जी भारत न्यूज24
गोपाल बसेड़िया
जिस स्थान पर कथा का आयोजन होता है तीर्थ कहलाता है : पं. बृजेश शास्त्री
भिण्ड । ग्राम दुल्हागन में भगवान शंकर , हनुमान मंदिर पर श्रीमद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजक गोविंददास महाराज (गिरदावल पाण्डेय) के नेतृत्व में कथा आयोजन स्थल से पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के साथ शुरू हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला, बच्चे व ग्रामीणजन श्रद्धालु शामिल रहे। महिलाओं और कन्याओं ने सिर पर कलश रखकर गाँव व विभिन्न मंदिरों की परिक्रमा करते हुए कथा आयोजन स्थल पर धार्मिक विधि एवं मंत्रोच्चरण के साथ कलश स्थापित किये। आरती के साथ शुरू किए गए श्रीमद् भागवत कथा में कथाव्यास पंडित बृजेश पाण्डेय शास्त्री जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम श्रीमदभागवत कथा की महिमा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर कथा का आयोजन होता है, वो तीर्थ स्थल कहलाता है, इसका श्रवण एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियों को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से भी श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। इसलिए सात दिन तक चलने वाली इस पवित्र कथा को श्रवण करके अपने जीवन को सुधारने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। अगर कोई सात दिन तक किसी व्यवस्तता के कारण नहीं सुन सकता है, तो वह दो तीन या चार दिन ही इसे सुनने के लिए अपना समय अवश्य निकालें। तब भी वो इसका फल प्राप्त करता है, क्योंकि ये कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है, जिसमें उनके अवतार से लेकर कंस वध का प्रसंग का उल्लेख होने के साथ साथ इसकी व्यक्ति के जीवन में महत्ता के बारे में भी बताया गया है। इसके सुनने के प्रभाव से मनुष्य बुराई त्याग कर धर्म के रास्ते पर चलने के साथ साथ मोक्ष को प्राप्त करता है। कथाव्यास ने बताया कि इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुना था, जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्य़ु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था।




