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अयोध्या / ब्यूरो रिपोर्ट
भारत देश में भ्रष्टाचार अब इस कदर पैर पसार चुका है कि भ्रष्टाचारियों के मन से न तो कानून का डर बचा है और न ही ईश्वर का भय। इसका सबसे ताजा और झकझोर देने वाला रूप अयोध्या में देखने को मिल रहा है, जहां हमारे आराध्य प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि पर भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में भी हेरफेर (चपत) करने का मामला सामने आया है। जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है और अब लोग सीधे सरकार से जांच की मांग कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार अब अधिकार बन चुका है?
देश में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब लोगों को इस शब्द से शर्म भी नहीं आती। ऐसा लगने लगा है जैसे भ्रष्टाचार कुछ लोगों के लिए उनका ‘अधिकार’ बन चुका है। आज हर छोटे-बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
बड़ा सवाल: इतने बड़े-बड़े मंदिरों के प्रबंधक और जुड़े हुए लोग रातों-रात इतनी महंगी-महंगी गाड़ियों और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने लगते हैं। आखिर इनका कौन सा गुप्त व्यापार या बिजनेस चल रहा है, जिससे इतनी अकूत संपत्ति खड़ी हो जाती है?
आम जनता पर छापा, तो रसूखदारों पर नरमी क्यों?
जनता का आरोप है कि सरकार आम व्यापारियों और आम लोगों के कारोबार पर जरा सी भी गड़बड़ी होने पर तुरंत छापा मार देती है। उनसे एक-एक पैसे का विवरण और हिसाब मांगा जाता है कि “इतना पैसा कहां से लाए हो?” लेकिन जब बात बड़े मंदिरों के प्रबंधकों या रसूखदारों की आती है, तो सरकार और प्रशासन इनके पास मौजूद इस अंधाधुंध पैसे का संज्ञान क्यों नहीं लेते? इसका भी पूरा विवरण सामने आना चाहिए।
“ईश्वर की लाठी में आवाज नहीं होती”
भले ही आज भगवान के साथ गद्दारी करने वाले लोग धन-दौलत के दम पर ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हों, लेकिन समय सबसे बलवान होता है। इतिहास गवाह है कि जिसने भी ईश्वर के घर में धोखा किया है, उसे देर-सवेर उसकी सजा भुगतनी ही पड़ी है।
आने वाली पीढ़ियों पर असर: सनातन सत्य है कि भगवान की मार और उनकी लाठी में आवाज नहीं होती। आज जो लोग पाप की कमाई पर जी रहे हैं, आने वाले समय में उनके परिवार और बच्चों का भविष्य क्या होगा, यह समय तय करेगा।
इतिहास साक्षी है: ऐसे कई उदाहरण हैं जहां पैसे के अहंकार में लोग भगवान को भूल गए, लेकिन जब ईश्वर का न्याय हुआ तो उन्हें आर्थिक, शारीरिक और मानसिक रूप से टूटना पड़ा। पैसे से भगवान को खरीदा नहीं जा सकता।
जनता की मांग: तुरंत हो कड़ी कार्रवाई
इस गंभीर मामले को लेकर अब सरकार से पुरजोर मांग की जा रही है कि:
अयोध्या धाम और बड़े मंदिरों के चढ़ावे में हेरफेर करने वालों की तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
जिन भी लोगों ने प्रभु के चरणों में अर्पित की गई राशि को चपत लगाई है, उन्हें चिह्नित कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
भ्रष्टाचारियों को ऐसी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए जो आगे के लिए एक मिसाल बने।
भगवान के घर में गद्दारी करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।
उत्तर प्रदेश, ब्यूरो चीफ देवेश प्रताप सिंह राठौर
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