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उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड। झांसी की बात करते हैं, झांसी मेडिकल कॉलेज के कई एक डॉक्टर अपने बड़े-बड़े नर्सिंग होम खोले हुए हैं, और जो नर्सिंग होम नहीं खोले हुए हैं वह प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और प्राइवेट नर्सिंग होम में वह अपने मरीज को भेजते हैं और वहां पर उनका समय निर्धारित नहीं होता है, जब उनका मरीज निर्धारित नर्सिंग होम में पहुंच जाता है तो उसे नर्सिंग होम से उनके पास फोन आ जाता है, और डॉक्टर साहब मेडिकल कॉलेज की ओपीडी छोड़कर अपने जूनियर से बोल देते हैं, कोई पूछे तो कह देना हम वार्ड में जा रहे हैं मरीज देखने और वह नर्सिंग होम में पहुंच के अपने मरीज को देखते हैं, यह सब होता है, वहां देखते हैं और मरीज को भरती भी होते हैं, जिससे वह मोटी रकम प्रतिदिन कमाते हैं, ऐसे भी डॉक्टर मेडिकल कॉलेज के अधिकतर है, हम बहुत पहले से सुनते चले आ रहे हैं पूर्व सरकारों से भी कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेगा सिर्फ बोलना है, जनता को समझाने के लिए लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। जहां सरकार बात करती है मरीज के हित के लिए वहीं पर मेडिकल कॉलेज के सामने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के बने हुए नर्सिंग होम सरकारी तंत्र की खिल्ली उड़ा रहे है, स्वास्थ्य मंत्री इस संदर्भ में मैंने कई एक बार फोन के माध्यम से बताना चाह स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी से मेरी बात हुई लेकिन कहावत कही गई है, डाक के तीन पात कोई निष्कर्ष नहीं निकला और ना कोई निष्कर्ष निकलना है क्योंकि सब एक दूसरे से बंधे हुए हैं किसी न किसी कारण से माध्यम से, झांसी नर्सिंग होम में मरीज भर्ती होने जाता है उसको पैसे से नोच लिया जाता है आईसीयू में भर्ती कर दिया जाता है और इलाज शुरू हो जाता है और पैसे की डिमांड बढ़ती जाती है आप सोच नहीं सकते हैं, एक-एक दिन का बिल लाखों में बनता है बताइए गरीब आदमी मध्यम वर्ग का आदमी नर्सिंग होम में इलाज कैसे करा सकता है, कुछ ना कुछ जमीन या घर बेचकर ही वह अपना इलाज नर्सिंग होम में करा आएगा क्योंकि इंसान सोचता है जान है तो जहान है और अपना इलाज करता है क्योंकि उसके सामने कोई विकल्प नहीं है। लेकिन डॉक्टर भ्रमित करके मरीज को सही डायग्नोज ना करके उसका शोषण करते हैं, और भर्ती करके पैसे नोचने का काम करते हैं, मैरिज ठीक हो या ना हो इससे उनका कोई मतलब नहीं जब मरीज अगर सीरियस हो गया उस समय कह देते हैं, अब आप दिल्ली ले जाइए या अन्य जगह ले जाइए इनकी हालत गंभीर हैं। सत्यता नहीं बताते हैं पैसे नोचने के चक्कर में इस तरह का वातावरण आज बन चुका है चिकित्सा स्वास्थ्य के क्षेत्र में, जबकि हमारे प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ईमानदार और बहुत ही मेहनत से कार्य कर रहे हैं। प्रदेश को उत्तम बनाने के लिए लेकिन उनके मंत्रिमंडल के मंत्री जमीनी स्तर पर कुछ और है माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश में हर तरफ अमन चैन बना रखा है, इतना अच्छा प्रदेश वर्तमान समय में है गुंडा मुक्त है कानून का राज्य है, महिलाएं बेटियां सुरक्षित हैं सब कुछ अच्छा है परंतु स्वास्थ्य और चिकित्सा पर थोड़ा सा विशेष ध्यान दें मुझे लगता है प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस किया जाए तो विकास पूर्ण रूप से भरपूर तरीके से प्रदेश उत्तम प्रदेश महा उत्तम प्रदेश बन सकता है। वैसे तो प्रदेश के लगभग सभी जिले में नर्सिंग होम के हालात हर जगह खराब है कहीं भी अच्छी सोच के नर्सिंग होम बहुत कम रह गए हैं,लगभग सब पैसा नोचते हैं ऐसे में क्या यह लोग कार्य शैली में बदलाव हो सकेगा मुझे लगता है ऐसा होना संभव नहीं है। फिर भी मैंने जनहित के लिए मैं लोगों तक गया और देखा तो कष्ट हुआ इंसानियत मानवता जीवित रहनी चाहिए।
देवेश प्रताप सिंह राठौर,ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




