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लखनऊ/झांसी। उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली विरासत को सहेजने के लिए प्रदेश की योगी सरकार निरंतर प्रयासरत है। कला, साहित्य और धर्म की इस पावन धरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा ‘अपनी धरोहर, अपनी पहचान’ जैसे अभियानों के माध्यम से ऐतिहासिक स्मारकों का कायाकल्प किया जा रहा है।
पर्यटन में उत्तर प्रदेश नंबर-1
वर्ष 2025 उत्तर प्रदेश के पर्यटन इतिहास के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया, जिसके चलते घरेलू पर्यटक आगमन में उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
कलाकारों को मिला वैश्विक मंच
वर्ष 2017 से पहले जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संख्या सीमित थी, वहीं अब हजारों कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। ‘उत्तर प्रदेश संस्कृति उत्सव’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को खोजा गया है। वर्तमान में संस्कृति विभाग की आर्टिस्ट डायरेक्टरी में 24,750 से अधिक कलाकार पंजीकृत हो चुके हैं।
प्रमुख उपलब्धियां और धार्मिक विकास
विश्व रिकॉर्ड: अयोध्या दीपोत्सव 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।
तीर्थ विकास परिषद: अयोध्या, ब्रज, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष तीर्थ विकास परिषदों का गठन।
अनुदान: कैलाश मानसरोवर यात्रियों को 1 लाख रुपये और सिंधु दर्शन यात्रियों को 20 हजार रुपये का अनुदान।
इंफ्रास्ट्रक्चर: लखनऊ में ‘राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल’ की स्थापना और बागपत के पुरामहादेव गांव को ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज’ का पुरस्कार।
भविष्य की योजना: 2026-27 का लक्ष्य
पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने 2026-27 में 1 लाख अतिरिक्त कमरे जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसमें 50,000 नए होम स्टे शामिल होंगे। साथ ही, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए महिला पर्यटक गाइडों का 10,000 रुपये का लाइसेंस शुल्क भी माफ किया गया है।
रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर




