जी भारत न्यूज24
उन्नाव, 27 दिसम्बर 2025
राष्ट्रीय फ़ाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद के चार ब्लाक- सुमेरपुर, गंज मुरादाबाद, बीघापुर और पुरवा में 10 से 28 फरवरी 2026 तक सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान चलेगा जिसके तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फ़ाइलेरिया रोधी दवा (एल्बेंडाजोल, डाईइथाइल कार्बामजीन और आइवरमेक्टिन) का सेवन कराएँगे | इसी क्रम में शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ |
प्रशिक्षण में नोडल अधिकारी डॉ. जयराम सिंह ने बताया कि सरकार ने साल 2027 तक फ़ाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है जिसके लिए सभी को प्रयास करने हैं | जनपद के चार ब्लॉक पुरवा, सुमेरपुर, बीघापुर और गंज मुरादाबाद में जून माह में फ़ाइलेरिया के प्रसार का पता लगाने के लिए Pre TAS (transmission assessment survey) सर्वे किया गया था | Pre TAS में इन चार ब्लाक में माइक्रोफ़ाइलेरिया रेट एक प्रतिशत से अधिक निकला | इसलिए इन चार ब्लाक में फ़ाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जायेगी क्योंकि यहाँ पर फ़ाइलेरिया का प्रसार दर अधिक है | यह सुनिश्चित करें कि सभी लक्षित लाभार्थी दवा का सेवन करें | यदि एक भी व्यक्ति दवा सेवन से वंचित रह जाता है तो वह संक्रमण फैला सकता है क्योंकि फ़ाइलेरिया का मच्छर काटने के पांच से 15 साल बाद इसके लक्षण दिखायी देते हैं तब तक वह स्वस्थ व्यक्तियों को अनजाने में संक्रमित कर चुका होता है |
नोडल ने कहा कि समय से ब्लॉक टास्क फ़ोर्स (बीटीएफ) की मीटिंग प्लान कर ली जाए और माइक्रोप्लान बनाया जाये |
जिला मलेरिया अधिकारी अर्चना मिश्रा ने बताया कि यह दवायें न केवल माइक्रोफ़ाइलेरिया को खत्म करती हैं बल्कि पेट से कीड़ों को भी निकालती हैं | दवा आशा कार्यकर्ता सामने ही खिलाएँगी | बाद में खाने के लिए किसी को भी नहीं देंगी | दवा सुरक्षित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित है | दवा सेवन के बाद कोई भी समस्या होती है तो आशा कार्यकर्ता से सम्पर्क करें या निकटम स्वास्थ्य केंद्र पर जाएँ |
विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल कोऑर्डिनेटर श्री राहुल ने जानकारी देते हुये बताया कि लोगों को बताएं कि यह बीमारी लाइलाज है और मच्छर के काटने से होती है | इस बीमारी से बचने का उपाय लगातार तीन साल तक साल में एक बार फ़ाइलेरियारोधी दवा का सेवन करना है और मच्छरों के काटने से बचना है | आईडीए अभियान के तहत लगातार तीन साल तक दवा का सेवन कर बीमारी से बचा जा सकता है | कुछ लोगों को दवा सेवन के बाद चक्कर आना, जी मितलाना, चकत्ते पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं | इसके बारे में पहले से ही समुदाय को अवगत कराएँ कि यह समस्या नहीं बल्कि शुभ संकेत हैं क्योंकि यह उन्हीं व्यक्तियों में दिखाई देते हैं जिनके शरीर में माइक्रोफ़ाइलेरिया या कृमि होते हैं | फ़ाइलेरियारोधी दवा खाने से इन माइक्रोफ़ाइलेरिया के मरने से यह लक्षण सामने आते हैं |
सहयोगी संस्था पाथ के डॉ शोएब ने अभियान के तकीनीकी पहलुओं के बारे में सभी को अवगत कराया |
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोगी संस्था पाथ से डॉ. अमरेश, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल(पीसीआई) से डॉ. ध्रुव, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च(सीफ़ॉर) के प्रतिनिधि मलेरिया इंस्पेक्टर, फाइलेरिया इंस्पेक्टर, एवं संबंधित ब्लाक के HEO, BCPM, LT डाटा ऑपरेटर सम्मिलित रहे I
फाइलेरिया के लक्षण जाने –
• शुरुआत में ठंड के साथ बुखार आ सकता है।
• शरीर के लटकने वाले अंगों – हाथ, पैर, पुरुषों के अंडकोष या महिलाओं के स्तनों में असामान्य सूजन।
• सूजन आमतौर पर एक ही अंग में होती है, दोनों में समान नहीं।
• मूत्र मार्ग से सफेद रंग का द्रव आना (ग्रामीण क्षेत्रों में ‘धात रोग’) जिसे चिकित्सा भाषा में काइलूरिया कहते हैं।
• लंबे समय तक रहने वाली सूखी खांसी भी फाइलेरिया का लक्षण हो सकती है (ट्रॉपिकल इस्नोफीलिया)।




