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भारत देश में यूजीसी कानून जो लागू किया है मोदी सरकार ने यह बहुत ही गलत कानून है भारतीय जनता पार्टी ने अपने पतन की नींव रख दी है जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी को दिल से चाहते थे लोग जो मोदी जी पर गर्व करते थे जो उनका मुख वोट था वह आज रो रहा है जो मोदी को बेहद प्यार करता था, आज भी करता है लेकिन यूजीसी कानून लाने से बहुत दुखी है और इसका परिणाम भारतीय जनता पार्टी को आने वाले समय में काफी नुकसान हो सकता है, केंद्र सरकार को इस पर विचार करना चाहिए यूसीजी कानून क्या है एक नजर में संक्षेप में जाने हर उच्च शिक्षा संस्थान में ‘इक्विटी कमेटी’ गठित करनी अनिवार्य होगी। इस कमेटी में SC, ST, OBC, दिव्यांग (PwD) और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए (आधे से ज्यादा सदस्य इन वर्गों से)।
‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा में अब स्पष्ट रूप से SC, ST और OBC को शामिल किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या विकलांगता आधारित अनुचित व्यवहार शामिल है।
शिकायत मिलने पर 24 घंटे में प्रारंभिक कार्रवाई तथा 60 दिनों में जांच पूरी करनी होगी।
शिकायत ऑनलाइन, हेल्पलाइन या अन्य माध्यम से दर्ज की जा सकती है।
उल्लंघन पर संस्थान की मान्यता रद्द हो सकती है, फंडिंग रोकी जा सकती है या आरोपी को चेतावनी, निलंबन, निष्कासन जैसी सजा मिल सकती है।
झूठी शिकायत पर पहले प्रस्तावित जुर्माने का प्रावधान अंतिम नियमों में हटा दिया गया है।
देवेश प्रताप सिंह राठौर ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




