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देवेश प्रताप सिंह राठौर, वरिष्ठ पत्रकार
भारत देश में कोई भी कोर्ट हो उसका सम्मान किया जाता है और हर व्यक्ति को उसका सम्मान करना चाहिए, अगर किसी के कोर्ट के निर्णय से दिक्कत है तो उच्च अदालत में अपील करें धरना प्रदर्शन ठीक नहीं निर्णय के विरुद्ध परंतु आजकल देखने को मिला है कोर्ट के डिसीजन के ऊपर धरना प्रदर्शन हो रहा है और कोर्ट को मीडिया और सोशल मीडिया में गलत संदेश प्रेषित हो रहे हैं कोर्ट के निर्णय को और उच्च कोर्ट को निर्णय को बदलना पड़ रहा है, यह रीति वन रही ठीक नहीं है। जिस तरह कुलदीप सिंह सेंगर के संदर्भ में हाई कोर्ट दिल्ली ने डिसीजन दिया उसके निर्णय के विरुद्ध जिस तरह देश में धरना प्रदर्शन लोगों की तरफ से हुआ और मीडिया में जिस तरह से चर्चा चली वह है, देश हित में ठीक नहीं कोर्ट का डिसीजन हर किसी को सम्मान करते हुए मानना चाहिए परंतु आजकल देख रहे हैं कोर्ट के डिसीजन पर धरना प्रदर्शन होता है। और उससे बड़ी कोर्ट में उसे केस को दवा दिया जाता है।
जिस तरह से किसान कानून बना था किसान कानून छोटे किसानों के लिए हितकारी था, परंतु दिल्ली में जिस तरह से धरना प्रदर्शन किसान के रूप में व्यापारियों के द्वारा किया गया सड़कों पर घर मकान बन गए, सड़क जाम कर दी महीनों होटल खुल गए और कितने दिन तक सब चलता रहा सुप्रीम कोर्ट ने भी इसमें अगुवाई की सुप्रीम कोर्ट ने बुलाया उन किसान लोगों को नेताओं को व्यापारियों को परंतु सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं गए और धरना प्रदर्शन जारी रहा तो, तो कोर्ट का मतलब ही क्या जब कोर्ट का सम्मान नहीं करते हैं तो ऐसे लोगों को अबमानना के तहत सजा का प्रावधान होना चाहिए, अन्त में सरकार को किसान कानून को रद्द करना पड़ा यही गलती से आज यह हो रहा है कि हर जगह कोर्ड और कानून के निर्णय को इसके पक्ष में नहीं होता वही राजनीतिज्ञ पार्टियों के सहयोग से जनता धरना प्रदर्शन दिया जाता है। दबाव बना रही है,जो ठीक नहीं है भविष्य के लिए ऐसी रीति को खत्म करने की जरूरत है। तभी निर्दोष बच सकेंगे और न्याय मिलेगा। अभी बहुत से मामले ऐसे हैं जहां पर निर्दोष लोग कई दशक तक जेल में रहे और बाद में निर्दोष साबित होकर छूट लेकिन जो लोग कई दशक तक जेल में रहे क्या उनके वह दिन वापस कोई दिला सकता है। कल ही मैने पेपर में पढ़ा एक निर्दोष 25 साल बाद कोर्ट ने साबित किया निर्दोषों है बताइए 25 वर्ष जेल में रहा पुरा जीवन परिवार सब समाप्त हो गया अब वह क्या कर सकेगा आधा जीवन तो उसने जेल में ही काट दिया तब उसे निर्णय मिला कि वह निर्दोष है।




