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बांगरमऊ,उन्नाव | बिजली विभाग द्वारा आधुनिकता के दावों के साथ लगाए गए ‘स्मार्ट मीटर’ अब उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। ‘स्मार्ट लूट’ के आरोपों के बीच विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है और मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर बिजली के भारी-भरकम बिलों ने ‘करंट’ मार दिया है।
स्मार्ट मीटर या ‘स्मार्ट लूट’? उपभोक्ताओं के गंभीर आरोप
बांगरमऊ और आसपास के इलाकों में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। उपभोक्ताओं का कहना है कि नए मीटर पुराने मीटरों की तुलना में दोगुना-तिगुना तेजी से भाग रहे हैं।
बिना चेतावनी कट रही बिजली: प्रीपेड मीटरों में बैलेंस खत्म होते ही बिना किसी सूचना के सप्लाई काट दी जा रही है।
रिचार्ज के बाद भी अंधेरा: उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि रिचार्ज करने के कई घंटों बाद भी बिजली बहाल नहीं होती, जिससे भीषण गर्मी में लोग बेहाल हैं।
दोगुना बिल: मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि बिजली की खपत पहले जैसी ही है, लेकिन बिल अचानक दो से तीन गुना बढ़ गया है।
विभाग का तर्क: “मीटर सटीक हैं, वायरिंग में हो सकती है खराबी”
दूसरी ओर, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मीटरों में किसी भी खराबी से इनकार कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि स्मार्ट मीटर बेहद सटीक हैं और वे उस बिजली (लीकेज) को भी रिकॉर्ड कर रहे हैं जो पुराने मीटर नहीं कर पाते थे। विभाग का कहना है कि बिजली की पुरानी वायरिंग में लीकेज या लोड का सही आकलन न होना बिल बढ़ने की मुख्य वजह हो सकती है।
आंदोलन की चेतावनी
समाधान न मिलने से नाराज नागरिक समूहों और संगठनों ने इसे ‘स्मार्ट लूट’ करार दिया है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि जब तक तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं, तब तक पुराने मीटर वापस लगाए जाएं। यदि बिलिंग की विसंगतियां जल्द दूर नहीं हुईं, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।




