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उत्तरप्रदेश ब्यूरो| देवेश प्रताप सिंह राठौर
असम में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। दिल्ली से लेकर असम तक हलचल तेज है। मंगलवार, 7 अप्रैल को असम पुलिस की एक टीम ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर कांग्रेस के दिग्गज नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ईस्ट आवास पर छापेमारी की।
क्या है पूरा मामला?
यह बड़ी कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक FIR के आधार पर की गई है। दरअसल, पवन खेड़ा ने हाल ही में रिंकी भुइयां पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उनके पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में बेहिसाब संपत्ति है। इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए मुख्यमंत्री की पत्नी ने कानूनी रास्ता अपनाया, जिसके बाद असम पुलिस एक्शन मोड में नजर आई।
जनता की राय: देश को चाहिए ‘दबंग’ नेतृत्व
इस पूरी कार्रवाई के बीच देश के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। आम जनमानस और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि देश को आज हिमंत बिस्वा सरमा जैसे दबंग और स्पष्टवादी मुख्यमंत्री की जरूरत है।
वरिष्ठ पत्रकार/विश्लेषक देवेश प्रताप सिंह राठौर का मानना है कि:
“आज देश के सनातनी समाज को एक ऐसे नेतृत्व की तलाश है जो निडर होकर फैसले ले सके। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा—इन दो चेहरों में से यदि कोई भी भविष्य में देश की बागडोर संभालता है, तो भारत का कल्याण निश्चित है। ऐसे तेजतर्रार नेताओं के हाथ में सत्ता होने से देश विरोधी ताकतें, घुसपैठिए और आतंकवाद जैसे मुद्दों का जड़ से खात्मा हो जाएगा।”
विदेशी नीति और कड़ा रुख
राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हिमंत बिस्वा सरमा जिस तरह से घुसपैठियों के खिलाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर मुखर रहते हैं, उससे पाकिस्तान जैसे देशों की ‘गीदड़ भभकियों’ का भी स्थाई हिसाब हो जाएगा। देश को आज एक ऐसे ही मजबूत इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व की आवश्यकता है जो आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर भारत को सशक्त बना सके।




