जी भारत न्यूज24
“आप करें तो सही, दूसरा करे तो जाति का आरोप!” यह आज हमारे देश और विभिन्न राज्यों की राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना बन चुकी है। देश के भीतर जब भी कोई क्षत्रिय समाज का व्यक्ति किसी बड़े या महत्वपूर्ण पद पर बैठता है, तो विपक्ष और विरोधी धड़े तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और यह आरोप मढ़ना शुरू कर देते हैं कि अमुक पद पर क्षत्रिय को बैठा दिया गया है। लेकिन क्या कभी किसी ने देश के उन अन्य राज्यों की तरफ आंख उठाकर देखा है, जहां मुख्यमंत्री अपने सजातीय लोगों को सबसे महत्वपूर्ण और मलाईदार पदों पर बैठाए हुए हैं? वहां कोई उंगली नहीं उठाता, वहां सब मौन रहते हैं।
उत्तर प्रदेश के अतीत का ज़िक्र और वर्तमान पर प्रहार
वरिष्ठ पत्रकार देवेश प्रताप सिंह राठौर ने देश की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों के दौर की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार थी और किस तरह सजातीय लोगों को चुन-चुनकर बड़े-बड़े और रसूखदार पदों पर बैठाया गया था, यह किसी से छिपा नहीं है।
उस दौर में भू-माफिया, खनन माफिया, अवैध ठेकेदार, मकानों और जमीनों पर कब्जे करने वाले तत्वों को किसका संरक्षण प्राप्त था? तब किसी ने आवाज क्यों नहीं उठाई? क्योंकि सरकार उनकी अपनी थी। लेकिन आज अगर उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार किसी न्यायप्रिय और योग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपती है, तो उस पर तुरंत जातिसूचक टिप्पणियां शुरू कर दी जाती हैं। राजनीति का यह दोहरा मापदंड बेहद निंदनीय है। क्या किसी एक वर्ग ने ही देश चलाने का ठेका ले रखा है? क्या ठाकुर, क्षत्रिय या पंडित समाज के आगे बढ़ने के लिए विपक्ष से राय लेनी होगी? विपक्ष को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल के इतिहास को एक बार ज़रूर खंगाल लेना चाहिए।
मध्य प्रदेश भाजपा नेतृत्व को बड़ी चेतावनी और मुख्यमंत्री बदलने की मांग
लेख के दूसरे हिस्से में देवेश प्रताप सिंह राठौर ने मध्य प्रदेश की जमीनी राजनीति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा के केंद्रीय आलाकमान को सचेत करते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के भीतर भाजपा को अपनी सरकार बचाए रखनी है और भविष्य के चुनावों में जीत दर्ज करनी है, तो नेतृत्व परिवर्तन बेहद जरूरी है।
राठौर ने बेबाकी से कहा, “मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री और एक-दो अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और आम जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता कम हो रही है। अगर समय रहते केंद्रीय नेतृत्व ने इन मुख्यमंत्रियों को नहीं बदला, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के लिए दोबारा सरकार बनाना बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।”




