जी भारत न्यूज24
हम भारत देश की बात करते है और भारत देश के अंदर आने वाले राज्यों के अंदर शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में सुधार होना चाहिए, उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों में जाकर देखें जिस तरह से चिकित्सा और शिक्षा का व्यवसाय वन गया है, वह एक प्रदेश और देश के विकास के लिए रास्ते का बहुत बड़ा कांटा है। क्यों क्योंकि जिस देश में शिक्षा और चिकित्सा पैसे के अभाव में अच्छे-अच्छे लड़के पढ़ने वाले शिक्षा नहीं ले पाते हैं, तथा पैसे के अभाव में चिकित्सा के क्षेत्र में अपना इलाज ठीक नहीं करवा पाते हैं और अंत हो जाता है, उनके परिवार वाले प्राइवेट स्कूलों में देश के बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपने बच्चों को पढ़ाने में सक्षम नहीं है। दूसरी बात और मैं कहना चाहता हूं जितने भी शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में व्यवसायीकरण हैं यह सब बड़े लोग हैं कोई प्रिंट मीडिया, पत्रकारिता से जुड़ा है, कोई इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारिता से जुड़ा है, किसी के बड़े-बड़े पेपर चलते हैं प्रिंट मीडिया के किसी के चैनल चलते हैं और कोई नेता से जुड़ा है, कोई बाहुबली से जुड़ा है, और कोई मंत्री से जुड़ा है, कोई ना कोई किसी न किसी माध्यम से वह अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं, जिस कारण चिकित्सा और शिक्षा में सुधार पूर्ण रूप से नहीं हो पा रहा है, और पढ़ने वाले बच्चे आज वंचित हो रहे हैं, मेरी उत्तर प्रदेश सरकार से और केंद्र सरकार से निवेदन है, शिक्षा और चिकित्सा पर ध्यान दीजिए इसको व्यवसायीकरण पर अंकुश लगाए और इसका सिर्फ एक ही इलाज है, जो वर्चस्वे वाले लोग हैं जिन लोगों के स्कूल प्राइवेट खुले हुए हैं, उनकी जांच होनी चाहिएपहली क्या थे और यह क्या है आज के दौरे पर उनके पास पैसा कितना अधिक कहां से आया इसकी जांच होनी चाहिए, तथा सरकार चिकित्सा के क्षेत्र में सरकारी तौर पर एक निश्चित आंकड़ा होना चाहिए एक मापदंड दिया जाना चाहिए जिसको लेकर चिकित्सा के क्षेत्र में प्राइवेट नर्सिंग अस्पतालों के लोग उसका पालन करें तभी देश विकास अच्छा करेगा ऐसा मेरा विचार है।
देवेश प्रताप सिंह राठौर,ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




