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गोपाल बसेड़िया
भिण्ड । शिव महापुराण कथा के चौथे दिवस में कथा का वर्णन करते हुए कथा व्यास पूज्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 राम भूषणदास जी महाराज महंत खनेताधाम ने कथा का चौथे दिवस में वर्णन करते हुए महर्षि नारद जी महाराज के जीवन की एक अदभुत घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उनको अभिमान हो गया एक मेने काम देव को जीत लिया नारद जी हिमालय की गुफा में साधना करने के लिए गये इन्द्र ने काम देव को भेजा काम ने पुष्प वाण छोडे पर नारद पर कोई प्रभाव नई हुआ उसने नारद से छमा मागी नारद ने छमा कर दिया परंतु नारद को अभिमान हो गया कि मैने काम को जीत लिया है,उन्होंने जाकर भगवान शिव को सारा वृतांत बताया भगवान शिव ने कहा यह बात आप भगवानविष्णु को मत बताना परंतु शिव के मना करने के बाद भी नारद ने विष्णु को सारा वृतांत बताया भगवान विष्णु ने सोचा अगर नारद जैसे भक्त को अभिमान हो गया हो श्रष्टि का विनाश हो जायेगा । भगवान ने मायामय नगर रचाकर नारद के गर्व को समाप्त किया नारद ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि आपको मनुष्य शरीर धारण करना पड़ेगा कुबेर जी के पू्र्व जन्म की कथा सुनाई सृष्टि वर्णन ब्रम्हा के पुत्र है, दक्ष की सन्तति एवं उनकी सती नाम की कन्या के जन्म और विवाह का वर्णन किया एवं पिता के द्वारा अपने पति का अपमान होने पर पिता के यज्ञ में जाकर अपने शरीर को योगिग्न मे जलाकर समाप्त किया और हिमाचल के यहां उनकी पत्नी मैना के गर्भ से उमा या पार्वती के रूप में जन्म ग्रहण किया पार्वती के जन्म का दिव्य उत्सव मनाया गया।
कथा में पधारे संत श्री श्री 1008 पत्ती वाले बाबा बरोही आश्रम, श्री 1008 महामण्लेश्वर हरिनिवास गिरधारी मठ चिलोंगाधाम सहित सैकड़ों भक्तों ने रसपान किया ।




