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ब्यूरो रिपोर्ट गोपाल बसेड़िया
भारत का वर्णमान एवं प्राचीन काल से ही विश्व मैत्री में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
भिण्ड। भारत ने सदैव अपने मित्र देश के साथ उनकी विपत्ति में सहायता की है। वैश्विक बीमारी कोविड 19 के दौरान 42 से अधिक देशों को वैक्सीन देकर मदद की वही आर्थिक और सामाजिक मदद भी पहुंचाई है। एवम सहयोग का यह क्रम निरंतर जारी है ।
उक्त उद्गगार भारत विकास परिषद की मासिक बैठक में
विदेशी मामलों के जानकार भरत चतुर्वेदी ने कहीं ।
भारत विकास परिषद की जागृति शाखा के द्वारा 30 जुलाई को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषितअंतरराष्ट्रीय मैत्री दिवस’ मानने के लिए शहर की श्रेक अकैडमी पर “वैश्विक मैत्री दिवस के अवसर पर वैश्विक मैत्री परिदृश्य में भारत की स्थिति” विषय पर विचार वैचारिक मंथन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भिंड के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर शैलेंद्र परिहार एमडी एवम शाखा की अध्यक्ष उषा नगरिया मंचासीन रहे।
मुख्य वक्ता के रूप में भरत चतुर्वेदी ने कई प्राचीन एवं आधुनिक घटनाओं को जोड़ते हुए भारत को वैश्विक पटल पर मित्र देश के रूप में प्रस्तुत किया।।
डॉक्टर शैलेंद्र परिहार ने विषय प्रवर्तन करते हुए बताया की भारतवर्ष सदैव से ही वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा पर कार्य किया है। हम केवल अपने पड़ोसी देशों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को अपना मित्र मानते हैं और बंधु मानते हैं ।
श्रेक एकेडमी निर्देशिका श्रुति गुप्ता द्वारा रामायण एवं महाभारत के प्रसंग के माध्यम से भारत में मित्रता का महत्व बताया ।
इस अवसर पर भारत भारत विकास परिषद के प्रांतीय संस्कार प्रमुख श्रवण पाठक, प्रांतीय सदस्य एवं शाखा संरक्षक डॉक्टर उमा शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
इस वैचारिक मंथन कार्यक्रम में आभार शाखा सचिव सीमा त्रिपाठी जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन परिषद के सदस्य समाजसेवी शिक्षक
गगन शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कैलाश नगरिया महेंद्र जैन नगर समन्वयक धीरज शुक्ला विनय जैन राहुल जैन पार्षद संजीव गुप्ता देवेंद्र अरोड़ा राजेश गुप्ता सुरेश बरुआ गोविंद सिंह भदोरिया मनोज दीक्षित संस्थापक सदस्य अरुणा पाठक रेखा अग्रवाल शकुंतला देवी श्रीमती पिंकी एवं बड़ी संख्या में श्रोताओ ने उपस्थित होकर वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति को जानने का प्रयास किया।।




