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भिंड (मध्य प्रदेश): विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत किस कदर डरावनी और शर्मनाक हो सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण जनपद पंचायत अटेर के ग्राम जमौरा (दिलीप सिंह का पुरा) में देखने को मिला है। यहाँ एक तरफ गाँव का बेटा यूपीएससी (UPSC) में द्वितीय स्थान प्राप्त कर CWPRS (केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधानशाला) में साइंटिस्ट के पद पर देश की सेवा कर रहा है और देश के लिए बड़े-बड़े बांधों (डैम) के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके 68 वर्षीय बुजुर्ग माता-पिता अपने ही गाँव की मुख्य सड़क पर फैले घुटनों तक के कीचड़ और दलदल से गुजरने को मजबूर हैं।
यह मामला तब पूरी तरह गरमा गया जब ग्राम जमौरा के जागरूक ग्रामीणों ने सरपंच विमला देवी और सचिव अभिलाख सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए , जिला पंचायत भिंड को एक सामूहिक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच और सचिव की आपसी जुगलबंदी के कारण ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर है और आम जनता मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
साइंटिस्ट के परिवार के साथ ऐसा बर्ताव, तो आम जनता का क्या होगा?
ग्रामीणों ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश के लिए प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सेवा दे रहे सचिन भदौरिया के घर तक जाने वाले रास्ते की यह दुर्दशा है और सरपंच-सचिव इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे आम गरीब ग्रामीणों के साथ कैसा बर्ताव करते होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग पूरे पुरा का मुख्य मार्ग है, जिससे होकर छोटे बच्चे विद्यालय जाते हैं, बुजुर्ग एवं महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए मंदिर जाती हैं और आम जन दैनिक आवागमन करते हैं। वर्तमान में यह पूरी सड़क केवल कीचड़, मिट्टी और पानी का भराव क्षेत्र बन चुकी है।
ग्रामीणों का बड़ा आरोप (कागजी इस्टीमेट का खेल):
दबाव बनाने पर सरपंच और सचिव ने पूर्व में इस सड़क निर्माण के लिए लगभग 7.5 लाख रुपये का प्राक्कलन (Estimate) लिखित रूप में दिया था। लेकिन अब वे अपनी बात से मुकरते हुए कह रहे हैं कि ‘फंड उपलब्ध नहीं है’ और कार्य को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है, जबकि पंचायत दर्पण पोर्टल पर सरकारी राशि का अन्य कार्यों में व्यय साफ दिखाई दे रहा है।
कागजों पर हो रहा विकास: ‘पंचायत दर्पण पोर्टल’ ने खोली पोल
सामूहिक ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार निवेदन करने पर सरपंच-सचिव हमेशा फंड न होने का रोना रोते हैं। इसके विपरीत, जब सजग ग्रामीणों द्वारा सरकारी ‘पंचायत दर्पण पोर्टल’ की जांच की गई, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। पोर्टल पर साफ दिखाई दे रहा है कि पंचायत निधि से लाखों रुपये गौशाला हेतु भूसा क्रय करने एवं विभिन्न मार्ग निर्माण कार्यों के नाम पर आहरित (निकाले) दिखाए गए हैं। वास्तविक धरातल पर न तो गौशाला में भूसा पहुँचा है और न ही संबंधित निर्माण कार्य पूरे हुए हैं। यह सीधे तौर पर पंचायत निधि के खुले दुरुपयोग और बेखौफ भ्रष्टाचार को इंगित करता है।
नरेगा और खाद्यान्न पर्ची में महाघोटाले का भंडाफोड़
ग्रामीणों ने केवल सड़क निर्माण में ही नहीं, बल्कि अन्य शासकीय योजनाओं में भी व्यापक स्तर पर रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप लगाया है:
अमीरों को थमाई खाद्यान्न पर्ची: शिकायत के अनुसार, सरपंच और सचिव ने मिलकर पैसों के अवैध लेनदेन (रिश्वत) के बल पर संपन्न लोगों और सरकारी कर्मचारियों के नाम भी फर्जी ‘परिवार खाद्यान्न सुरक्षा पात्रता पर्ची’ जारी कर दी है, ताकि संपन्न लोग भी गरीबों के राशन पर खुलेआम डाका डाल सकें।
मनरेगा में पत्नियों के नाम पर सरकारी धन का आहरण: इससे भी बड़ा चौंकाने वाला मामला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में सामने आया है। आरोप है कि शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों की पत्नियों तक को कागजों पर ‘नरेगा मजदूर’ दर्शाकर उनके नाम से सरकारी धन का अवैध आहरण किया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो नरेगा और राशन वितरण में एक बहुत बड़ा महाघोटाला उजागर होगा।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि उनके मूलभूत अधिकारों—जैसे सुव्यवस्थित मार्ग की उपलब्धता—का हनन अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र ही इस गंभीर मामले में संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं की और सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं करवाया, तो समस्त ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार और देश के गौरव (साइंटिस्ट) के परिवार के साथ हो रहे इस घोर अन्याय पर क्या ठोस कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिलता रहेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट शिवराज सिंह कुशवाह




