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गोपाल बसेड़िया
दबोह । मित्रता करो,तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी।यह बात दबोह नगर के वार्ड नम्बर 15 कुरचनिया मोहल्ला में हनुमान सरकार मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत भागवत कथा के दौरान सुप्रसिद्ध हनुमान मंदिर दंदरौआ सरकार धाम के परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 रामदास जी महाराज के प्रिय शिष्य कथावाचक पँडित पवन शास्त्री जी(दंदरौआ धाम)ने कही कथाव्यास ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा मित्र वही है,जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे।परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है।जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है,तब तक मित्रता रहती है।जब स्वार्थ पूरा हो जाता है,मित्रता खत्म हो जाती है।उन्होंने कहा कि एक सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी जाते हैं।जब वह महल के गेट पर पहुंच जाते हैं,तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते है और अंदर जाने की बात कहते हैं।सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते है और कहते है कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र व्यक्ति कैसे हो सकता है।प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा अपने मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं।तभी एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है और अपने आप को आपका मित्र बता रहा है।द्वारपाल की बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं और अपने मित्र को रोककर सुदामा को रोककर गले लगा लिया।उन्होंने कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं।वह जीवन में जितने गरीब नजर आए,उतने वे मन से धनवान थे।उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे,बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा।मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए।अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए।जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए।श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गए।वहीं आज की अंतिम कथा में लहार विधायक अम्बरीश शर्मा(गुड्डू)के अनुज भ्राता अखिलेश शर्मा(बंटू)श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करने पहुंचे और वहां पहुँचकर व्यासपीठ से कथाव्यास जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।




