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ग्वालियर। दंदरौआ धाम, शताब्दी पुरम में आयोजित एक दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता प्रवचन कार्यक्रम में शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज शामिल हुए। रक्षक मोर्चा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने देश की वर्तमान परिस्थितियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रखी।
अपने उद्बोधन के दौरान यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने विवादित यूजीसी (UGC) नियमों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि इन नियमों को वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इससे देश में व्यापक असंतोष उत्पन्न हो सकता है, जो आगे चलकर टकराव की स्थिति भी पैदा कर सकता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा का आह्वान
ग्वालियर की धरती से हिंदू समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या और सामाजिक संतुलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत हिंदुओं की अंतिम आश्रय भूमि है और इसकी सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय और समाज से एकजुट होकर अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहने की अपील की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने उनके विचारों को सुना।




