जी भारत न्यूज24
अटेर (भिंड)। ज़ी भारत न्यूज़ 24 की धारदार और निष्पक्ष पत्रकारिता का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। जनपद पंचायत अटेर के अंतर्गत अमृत सरोवर योजना में चल रहे भ्रष्टाचार और घोटाले की खबर प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने स्वयं मौके पर पहुंचकर निवारी पंचायत में बन रही एक पुलिया का औचक निरीक्षण किया है।
पत्रकारों से बदसलूकी के बाद बैकफुट पर प्रशासन
गौरतलब है कि बीते दिनों जब ‘ज़ी भारत न्यूज़ 24’ की टीम इस महाघोटाले की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और जनता की आवाज उठाने जनपद कार्यालय पहुंची थी, तब जनपद CEO ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए मर्यादाओं को ताक पर रख दिया था। उन्होंने कवरेज करने गए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों के साथ न सिर्फ अभद्र भाषा (Bad Words) का इस्तेमाल किया, बल्कि अहंकार में चूर होकर यह तक कह दिया था कि “यह एक सरकारी चैंबर है, यहाँ न्यूज़ नहीं बनेगी।”
लेकिन ज़ी भारत न्यूज़ 24 ने न तो अपना हौसला खोया और न ही रसूखदारों के आगे घुटने टेके। निष्पक्ष, निडर और निरंतर रिपोर्टिंग के जरिए इस घोटाले और बदसलूकी के सच को जनता के सामने लाया गया।
खुद जांच करने जमीन पर उतरने को मजबूर हुए CEO
खबर का असर इतना व्यापक रहा कि जो अधिकारी कल तक बंद कमरों में बैठकर पत्रकारों को रौब दिखा रहे थे, उन्हें आज खुद चिलचिलाती धूप में ज़मीन पर उतरकर नव निर्माण पुलिया की बदहाली को देखने के लिए मजबूर होना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान पुलिया के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं और तकनीकी कमियां पाई गई हैं, जिन्हें देखकर अधिकारी भी बगले झांकते नजर आए।
जनता में ज़ी भारत न्यूज़ 24 के प्रति बढ़ा भरोसा
इस बड़े असर के बाद क्षेत्र की ग्रामीण जनता में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ज़ी भारत न्यूज़ 24 ने इस मुद्दे को पूरी ताकत से नहीं उठाया होता, तो भ्रष्टाचारी इस पूरे मामले को दबा चुके होते। पत्रकारों से अभद्रता करने वाले अधिकारियों को ज़ी भारत न्यूज़ 24 के इस करारे जवाब ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज और सच्चे पत्रकारों की कलम को किसी भी सरकारी चैंबर की बंद दीवारों में कैद नहीं किया जा सकता।
सूत्रों की मानें तो इस निरीक्षण के बाद अब दोषी उपयंत्री (Sub Engineer), सरपंच और सचिव पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश होती है या फिर धरातल पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, ज़ी भारत न्यूज़ 24 (अटेर, भिंड)




