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भिण्ड | 31 मई 2026
शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं में लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ भिण्ड जिले में बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत भिण्ड वीरसिंह चौहान ने कार्य में घोर लापरवाही बरतने पर तीन ग्राम पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई हितग्राहियों की ई-केवाईसी (e-KYC) की बेहद कम प्रगति और श्रमिकों के पंजीयन नहीं किए जाने के कारण की गई है।
इन सचिवों पर गिरी निलंबन की गाज
जिला पंचायत सीईओ द्वारा जारी आदेश के अनुसार निम्नलिखित सचिवों को सस्पेंड किया गया है:
लखनलाल झा – सचिव, ग्राम पंचायत टोला (जनपद पंचायत लहार)
रामनिवास भदौरिया – सचिव, ग्राम पंचायत स्योंडा / मूल ग्राम पंचायत भौनपुरा (जनपद पंचायत भिण्ड)
राजेश सिंह – सचिव, ग्राम पंचायत मूरतपुरा (जनपद पंचायत रौन)
क्यों हुई कार्रवाई? (निलंबन का कारण)
मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीरसिंह चौहान ने बताया कि 29 मई 2026 को जारी समग्र ई-केवाईसी प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई थी। इस समीक्षा में पाया गया कि उक्त ग्राम पंचायतों में:
समग्र पोर्टल पर संबल/कर्मकार पंजीयन और जननी प्रसव योजना के समस्त हितग्राहियों की ई-केवाईसी की प्रगति अत्यंत कम थी।
शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी और हितग्राही मूलक योजना ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना’ के अंतर्गत श्रमिकों के पंजीयन नहीं किए गए थे।
शासन के निर्देशों की अवहेलना और शासकीय कार्यों में उदासीनता पाए जाने पर इन तीनों सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि के नियम
मुख्यालय निर्धारण: निलंबन काल के दौरान इन सभी सचिवों का मुख्यालय संबंधित जनपद पंचायत कार्यालय नियत किया गया है।
जीवन निर्वाह भत्ता: निलंबन की अवधि में संबंधित सचिवों को शासन के नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जिला पंचायत सीईओ की इस सख्त कार्रवाई से जिले के अन्य पंचायत कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।




