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भिण्ड । प्रेस मीडिया पत्रकार कल्याण संघ के राष्ट्रीय महासचिव व पुष्पांजली टुडे न्यूज के पूर्व स्टेट हेड पंकज त्रिपाठी ने कहा कि भिंड पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में कमरा बंद कर कुछ पत्रकारों की पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव के कहने पर पुलिस अधिकारियों द्वारा मारपीट करने का पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारियों पर आरोप लगे हैं,त्रिपाठी ने कहा कि अगर ऐसा किया गया है,तो वास्तविक में यह घटना शर्मशार करने वाली एवं चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता क्या है यह तो घटनाक्रम के समय वहां मौजूद रहे लोग ही बता सकते हैं या फिर निष्पक्ष जांच उपरांत ही वास्तविकता का पता चल सकता है । त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पुलिस महानिदेशक से निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है,टकराव नहीं पुलिस और पत्रकार दोनों ही लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं,दोनों की ही भूमिका समाज के लिए सेवा और सुरक्षा की है,लेकिन जब इनके बीच अविश्वास की दीवार खड़ी हो जाए,तो सबसे अधिक नुकसान आम जनता को होता है। त्रिपाठी ने कहा कि यह आवश्यक है कि संवाद के रास्ते खुले रखें जाएं,और हर पक्ष की बात को सुना जाए,समझा जाए और जांच की जाए,क्योंकि प्रशासन और प्रेस दोनों को ही जिम्मेदारी निभानी है ।
त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों पर पत्रकारों की मारपीट की घटना के आरोप लगे है,तो मेरी सरकार से यही मांग है,कि उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए,और अगर पत्रकारों द्वारा लगाये गये आरोप सत्य है,तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने कहा कि वहीं मीडिया जगत को भी यह तय करना होगा कि वह अपने बीच उन चेहरों को छांटे जो पत्रकारिता के नाम पर पेशे की गरिमा को नुकसान पहुँचा रहे हैं,यह भी उतना ही आवश्यक है कि किसी भी आरोप या शिकायत पर बिना पुष्टि के किसी की छवि को धूमिल न किया जाए चाहे वह पत्रकार हो या पुलिस अधिकारी,सच की तह तक पहुँचना ही पत्रकारिता का धर्म है,उन्होंने कहा कि यह पूरा विवाद एक अवसर है कि हम पत्रकारिता और पुलिस प्रशासन दोनों में पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी को लेकर एक ईमानदार चर्चा करें,अगर कोई अधिकारी दोषी है,तो उसे जवाबदेह ठहराना चाहिए और उसके खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए,लेकिन अगर कोई पत्रकार अपने पद का दुरुपयोग कर रहा है,तो उस पर भी उतनी ही गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर पिटाई एवं अपमानित करने के लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच ज़रूरी है,ताकि पुलिस प्रशासन और मीडिया दोनों के बीच पारस्परिक विश्वास बहाल हो सके।




