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झांसी |उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। यहाँ कब बिजली गुल हो जाए और कब तक वापस न आए, इसका कोई भरोसा नहीं है। भीषण गर्मी और कटौती से बेहाल जनता जब समाधान के लिए अधिकारियों को फोन करती है, तो उन्हें राहत के बजाय गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिलते हैं।
अधिकारियों की बेरुखी: फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली की अघोषित कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। जब लोग समस्या को लेकर JE (जूनियर इंजीनियर), SDO या EXEN (अधिशाषी अभियंता) को फोन लगाते हैं, तो या तो फोन उठाया नहीं जाता या फिर गोल-मोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
EXEN का अजीबोगरीब बयान: “बिजली विभाग से जानकारी करिए”
इस समस्या को लेकर जब हमारे प्रतिनिधि ने EXEN (मोबाइल नंबर: 09415909540) से संपर्क किया, तो उनका रवैया बेहद चौंकाने वाला रहा। उन्होंने पूरी बात सुनने के बजाय दो-टूक शब्दों में कहा:
“लाइट क्यों नहीं आ रही, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। आप बिजली विभाग से जानकारी करिए।”
हैरानी की बात यह है कि जो अधिकारी जिले की बिजली व्यवस्था का सर्वेसर्वा है, अगर उसे ही नहीं पता कि उसके क्षेत्र में बिजली क्यों गुल है, तो फिर आम जनता किससे उम्मीद लगाए?
एसी में बैठे अफसरों को जनता के दर्द से सरोकार नहीं?
जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इन बड़े अधिकारियों के दफ्तरों और घरों में एसी चल रहे हैं, जनरेटर की सुविधा है, इसलिए उन्हें पता ही नहीं चलता कि लाइट कब गई और कब आई। उन्हें आम आदमी की तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है।
अधिकारियों का यह बेखौफ अंदाज यहाँ तक है कि वे खुलेआम कहते हैं कि “कहीं भी शिकायत करिए, कुछ नहीं होगा।” यह व्यवहार न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि सीधे तौर पर सरकार की छवि को धूमिल करने वाला है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
प्रदेश की सरकार जनता को बेहतर बिजली सुविधा देने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर अधिकारी बेलगाम हैं। जनता ने प्रदेश के मुखिया (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) से निवेदन किया है कि बिजली विभाग के इन निरंकुश अधिकारियों पर लगाम कसी जाए और झांसी की जनता को इस नारकीय स्थिति से निजात दिलाई जाए।
मुख्य बिंदु:
झांसी में बिजली की अघोषित कटौती से जनता परेशान।
JE, SDO और EXEN नहीं उठाते जनता के फोन।
EXEN ने जानकारी होने से किया इनकार, कहा- “कहीं भी शिकायत करो”।
अधिकारियों की अभद्रता और लापरवाही के खिलाफ शासन से कार्रवाई की मांग।




