जी भारत न्यूज24
वृन्दावन (मथुरा)। श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्राचीन श्री केशी घाट पर सैकड़ों ब्राह्मणों ने राष्ट्र उत्थान और सनातन धर्म की रक्षा के लिए पारंपरिक श्रावणी उपाकर्म पूजा संपन्न की। यह वृहद धार्मिक आयोजन आचार्य पंडित श्री नरोत्तम लाल सेवा संस्थान के तत्वावधान में पूरी तरह नि:शुल्क आयोजित किया गया।
यह अनुष्ठान आचार्य पंडित श्री विष्णु कांत शास्त्री जी के पावन सानिध्य और आचार्य मृदुल कांत शास्त्री के संयोजकत्व में संपन्न हुआ।
देह शुद्धि और प्रायश्चित का पावन पर्व
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक आचार्य विष्णु कांत शास्त्री जी ने उपाकर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:
“श्रावणी उपाकर्म प्रत्येक विप्र के लिए वर्ष में एक बार किया जाने वाला अनिवार्य अनुष्ठान है। मानव जीवन में जाने-अनजाने कई प्रकार की त्रुटियां, दोष और पाप हो जाते हैं। इन सभी के प्रायश्चित और देह शुद्धि के लिए यह अनुष्ठान अत्यंत आवश्यक है।”
अनुष्ठान के प्रमुख चरण
आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, पंडित अशोक शास्त्री एवं आचार्य पार्वती वल्लभ जी के अनुसार उपाकर्म पूजा निम्नलिखित विधि से संपन्न हुई:
हिमाद्रि संकल्प: हिमाद्री ऋषि रचित संकल्प के माध्यम से समस्त पापों के शमन का मनोरथ लिया गया।
दशविध स्नान: विप्रजनों ने सर्वऔषधि, फल रस, हिरण्य, कुशा और दूर्वा आदि से पवित्र स्नान किया।
अपामार्ग मार्जन: मुख्य औषधि अपामार्ग के जल से स्नान और विशेष मुद्राओं के साथ मार्जन किया गया।
सूर्य आराधना: भगवान सूर्य नारायण का पूजन, दैनिक संध्या वंदन, गायत्री जाप और सूर्य उपस्थान के साथ राष्ट्र उन्नति व तेजस्वी बनने की कामना की गई।
सप्तऋषि पूजन: प्राचीन श्री राधाकांत मंदिर में माता अरुंधति सहित सप्त ऋषियों और चारों वेदों के प्रमुख मंत्रों एवं ऋषियों का पूजन-स्मरण कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
यज्ञोपवीत धारण: दिल्ली से आए श्री संजीव अग्निहोत्री, श्री कार्ष्णि और रामचंद्र दास जी ने बताया कि भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के आह्वान के साथ नए यज्ञोपवीतों का पूजन किया गया, जिसे विप्रजनों ने बड़े-बुजुर्गों को समर्पित कर धारण किया।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में श्री आर के पांडे, विनय त्रिपाठी, सुरेश शास्त्री, विपिन बापू, पंडित नीरज गौड़, पवित्र कृष्ण शर्मा, निरंजन गौतम ‘बंटू’, विष्णु गौतम, द्वारकाधीश रवि शंकर मिश्रा, प्रदीप बल्लभ गोस्वामी, नागेश मिश्रा, ब्रज अग्रवाल, पंकज शास्त्री सहित सैकड़ों की संख्या में विप्रजन उपस्थित रहे।
आनन्द पचौरी (वृन्दावन संवाददाता)
स्रोत: आचार्य मृदुलकान्त शास्त्री जी




