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युद्ध से विकास रुकता है,परंतु जब मान, सम्मान, स्वाभिमान देश की सुरक्षा की बात हो वहां पर युद्ध आवश्यक है,भगवान कृष्ण ने युद्ध के मैदान में कितने दिनों तक अर्जुन को भगवद गीता सिखाई,
भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध के मैदान में अर्जुन को कुल 18 दिन तक अर्जुन को ज्ञान दिया था।
गीता में भक्ति, ज्ञान और कर्म से जुड़ी कई ऐसे बातें बताई गईं है जो मनुष्य के लिए हर युग में महत्वपूर्ण हैं। गीता के प्रत्येक शब्द पर एक अलग ग्रंथ लिखा जा सकता है। गीता में सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकास क्रम, हिन्दू संदेशवाहक क्रम, मानव उत्पत्ति, योग, धर्म-कर्म, ईश्वर, भगवान, देवी-देवता, उपासना, प्रार्थना, यम-नियम, राजनीति, युद्ध, मोक्ष, अंतरिक्ष, आकाश, धरती, संस्कार, वंश, कुल, नीति, अर्थ, पूर्वजन्म, प्रारब्ध, जीवन प्रबंधन, राष्ट्र निर्माण, आत्मा, कर्मसिद्धांत, त्रिगुण की संकल्पना, सभी प्राणियों में मैत्रीभाव आदि सभी की जानकारी है। गीता का मुख्य ज्ञान श्रेष्ठ मानव बनना, ईश्वर को समझना और मोक्ष की प्राप्ति है।
महाभारत में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया,जिसे सिर्फ अर्जुन ने सुना।फिर गीता को लिपिबद्ध किसने किया?
क्या यह सच है कि कुरुक्षेत्र की लड़ाई के बाद अर्जुन फिर से गीता सुनना चाहते थे, लेकिन कृष्ण ने कहा कि वह एक बार फिर गीता का पाठ करने में असमर्थ हैं। कृष्ण ने क्यों कहा कि वह “असमर्थ” है,
भगवद गीता भगवान कृष्ण की सेवा के रूप में इस ग्रह पर अरबों लोगों को रोजगार कैसे प्रदान कर सकती है।
भगवान श्री क्रष्ण द्वारा अर्जुन को गीता सुनायी गयी, तब समय स्थिर हो गया था और वह गीता सुनने वाले लोग भी बहुत कम थे। यद्यपि कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरव और पांडव पक्ष से 18 अक्षौहिनी सेना मौजूद थी, लेकिन श्रीकृष्ण के तेज से सबकी आंखे चोन्धिया गयी। सभी उपस्थित योद्धा लगभग अर्ध मूर्क्षित अवस्था मे थे। क्या हुया, किसने किस्से क्या कब कुओं कहॉ, यह किसी को नही पता। बस उपस्थित सारथी रथी महारथी अतिरथी सैनिक सेवक आदि को बस यही पता था कि अर्जुन श्रीक्रशन रथ के साथ दोनों सेनाओं के मध्य में आये है।
जब महाभारत का युद्ध चल रहा था अर्जुन मोह माया में फंस गए थे, उसे समय श्री कृष्ण ने उन्हें उपदेश दिया था उसके बाद उन्होंने युद्ध किया सिर्फ गीता पाठ देखने सुनने वाले अर्जुन और संजय थे। संजय ने यही पाठ राजा धृतराष्ट्र को सुनाया। व्यास जी ने भी गीता सुना। रथ की पताका पर स्थित बैठे हुए श्री हनुमान ने भी गीत देखी सुनी। क्योंकि समय स्थिर हो गया था अतः कितनी देर लगी कटनी समय मे अर्जुन का संशय दूर हुया और वह कायरता मोह त्यागकर अपने कर्तव्य को समझ सका यह किसी को नही पता परंतु क्या सुना क्या संवाद हुया कितने श्लोक किसने किस्से कहे यह गीता में लिखा है और हम आज पढ़ सकते है। अब देश के प्रधानमंत्री जी को हर स्थिति में पाकिस्तान को उसके किए की सजा देनी चाहिए क्योंकि दुष्ट को वार क्षमा करना वह कायर समझने लगता है, इस स्थित में दुष्टता को बढ़ावा देना होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा कि हे पार्थ! तुम्हें अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करना चाहिए और एक क्षत्रिय की भांति अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए. यही तुम्हारा धर्म है. श्रीकृष्ण ने अपना उपदेश दिया तब अर्जुन युद्ध के लिए तैयार हुए।
अब समय आ गया है पाकिस्तान को भुखमरा नंगे पाकिस्तान को उसे सबक सिखाने का अब समय आ चुका है। सिंधु नदी का पानी बंद करने की पूर्ण रूप से व्यवस्थाएं बनानी चाहिए।
देवेश प्रताप सिंह राठौर,ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




