जी भारत न्यूज24
झांसी। उत्तर प्रदेश के महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. सचिन माहुर अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता और सेवाभावी कार्यशैली को लेकर इन दिनों हर जगह प्रशंसा बटोर रहे हैं। सरकारी व्यवस्थाओं को धरातल पर उतारने और मरीजों को सुलभ इलाज मुहैया कराने में उनका प्रयास सराहनीय है।
अस्पताल की जमीनी हकीकत जानने के लिए जब हमारे संवाददाता ने व्यक्तिगत रूप से मेडिकल कॉलेज की ओपीडी (OPD) से लेकर मरीजों के जनरल वार्ड तक का दौरा किया और वहां भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों से बातचीत की, तो बेहद सकारात्मक फीडबैक देखने को मिला।
मरीजों को भागदौड़ से मिली मुक्ति, सुव्यवस्थित हुआ सिस्टम
मेडिकल कॉलेज का परिसर बहुत बड़ा होने के कारण अक्सर ग्रामीण और अनजान मरीजों को भटकना पड़ता था। लेकिन वार्डों में भर्ती कई मरीजों और उनके तीमारदारों ने बताया कि अब यहाँ ऐसी कोई समस्या नहीं होती।
बेहतर गाइडेंस: सीएमएस सचिन माहुर ने अस्पताल के स्टाफ और कर्मचारियों को इस तरह से निर्देशित किया है कि वे आने वाले हर जरूरतमंद को सही रास्ता और काउंटर बताते हैं।
पारदर्शिता और सुलभता: सरकार की तरफ से मिलने वाली हर मुमकिन दवा और जांच की सुविधा गरीब व कमजोर वर्ग के मरीजों तक बिना किसी अड़चन के पहुँच रही है।
स्टाफ को सीएमएस का कड़ा और संवेदनशील पाठ: “मरीज और तीमारदारों से रखें केवल सदव्यवहार”
ग्राउंड रियलिटी चेक के दौरान एक बेहद खास बात सामने आई जो सीएमएस डॉ. सचिन माहुर के नेतृत्व को दर्शाती है। वे अपने जूनियर डॉक्टरों, ट्रेनिंग ले रहे छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और स्थाई कर्मचारियों को बेहद प्यार और संजीदगी से समझाते हैं।
उन्होंने अपने पूरे स्टाफ को स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं:
“अगर कोई मरीज या उनके साथ आया तीमारदार (परेशानी या तनाव के चलते) कुछ कड़वा या गलत बोल भी दे, तो भी स्टाफ को पलटकर जवाब नहीं देना है। आपको सिर्फ अपने काम पर ध्यान देना है और पूरी तरह से मरीज की सेवा के प्रति समर्पित रहना है।”
पत्रकार की कलम से (संपादकीय टिप्पणी)
हमारी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या पक्षपात नहीं होता है। लेकिन अगर कोई अधिकारी ईमानदारी से अच्छा कार्य करता है, मरीजों के हित के लिए जीता है और सरकार की जनहितैषी नीतियों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाता है, तो एक सजग पत्रकार होने के नाते हम उसके समर्थन में खड़े हैं। समाज को यह बताना जरूरी है कि आज भी सिस्टम में अच्छे लोगों की संख्या बहुत है, बस उन्हें समझने और सराहने की जरूरत है।
व्यवहार से ही ठीक हो जाता है आधा रोग
यह सच है कि कई बार अस्पतालों में कुछ ऐसे तीमारदार भी आते हैं जो नासमझी में या बिना वजह विवाद की स्थिति पैदा करते हैं। लेकिन इसके बावजूद डॉ. सचिन माहुर का अपने स्टाफ को यही कहना रहता है कि आप सभी का सम्मान करेंगे और अच्छा व्यवहार ही रखेंगे।
वास्तव में, यदि प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों के जिम्मेदार भी महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज के सीएमएस की तरह संवेदनशील व्यवहार अपना लें, तो मरीजों का आधा रोग तो डॉक्टरों और स्टाफ के मीठे व्यवहार से ही ठीक हो जाएगा। डॉ. सचिन माहुर की कार्यक्षमता और व्यवहार कुशलता आज अन्य अधिकारियों के लिए भी एक बेहतरीन सीख है।




