जी भारत न्यूज24
भिण्ड। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), महिला एवं बाल विकास अधिकारी, समस्त ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान कलेक्टर ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा शासकीय योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का तुरंत हो संतुष्टिपूर्वक निराकरण
एक-एक शिकायत की समीक्षा:
कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर लंबित शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एक-एक शिकायत को गंभीरता से पढ़ा जाए और आवेदकों की संतुष्टि के साथ उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
100 दिन से लंबित मामलों पर सख्ती:
कलेक्टर ने 100 दिन से अधिक समय से लंबित पड़ी शिकायतों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि इन पुरानी लंबित शिकायतों का जल्द से जल्द और प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए।
गर्भवती महिलाओं की जांच और एएनसी रजिस्ट्रेशन की हुई समीक्षा
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने एएनसी (ANC) रजिस्ट्रेशन और चेकअप की स्थिति का जायजा लिया:
चारों जांचें और समय पर एंट्री अनिवार्य:
कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं की होने वाली चारों स्वास्थ्य जांचों और पोर्टल पर उनकी सही समय पर एंट्री (Proper Entry) सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में सितंबर से मई माह तक की एएनसी रजिस्ट्रेशन की प्रगति रिपोर्ट की भी बारीकी से समीक्षा की गई।
घर-घर जाकर जांच करने के निर्देश:
कलेक्टर ने कहा कि एएनसी चेकअप नियमित और समय पर होना चाहिए ताकि गर्भवती महिलाओं को सही और उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने और घर-घर जाकर जांच रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर का मुख्य संदेश:
“स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए यह बेहद अनिवार्य है कि विभाग का प्रत्येक कर्मचारी और अधिकारी हर एक लाभार्थी तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करे।”
कुपोषित (SAM) बच्चों की स्थिति और फर्स्ट ट्राइमेस्टर पर चर्चा
बैठक के दौरान फर्स्ट ट्राइमेस्टर (गर्भावस्था की पहली तिमाही) रजिस्ट्रेशन की स्थिति और जिले में चिन्हित किए गए ‘सेम’ (SAM – गंभीर कुपोषित) बच्चों के स्वास्थ्य सुधार को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों को अपने-अपने तय पैरामीटर्स के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने और मैदानी स्तर पर दिख रही कमियों को शीघ्रता से दूर करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने पूरी व्यवस्था की निगरानी और त्वरित समाधान पर आधारित एक ठोस कार्ययोजना बनाने की बात कही।




