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जी भारत न्यूज24
श्योपुर (मध्य प्रदेश): जिले में साल 2021 में आए भीषण बाढ़ के दौरान बांटी गई राहत राशि में हुए बहुचर्चित घोटाले में अब प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने मामले में संलिप्त 18 आरोपी पटवारियों के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा) चलाने की आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। कलेक्टर के इस कड़े कदम के बाद अब आरोपियों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
तहसीलदार की गिरफ्तारी के बाद गहराया था मामला
आपको बता दें कि इस बहुचर्चित घोटाले की मुख्य आरोपी तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर थीं। उनकी गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुली थीं। अब 18 पटवारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद बड़ौदा थाना पुलिस इन आरोपियों के खिलाफ अदालत से वारंट जारी कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इस मामले में पुलिस की जांच पहले ही पूरी हो चुकी थी और केवल शासन स्तर से अभियोजन की हरी झंडी मिलने का इंतजार था।
रिश्तेदारों के फर्जी खातों में डाले थे ₹2.5 करोड़
बड़ौदा थाने में दर्ज एफआईआर में इन 18 पटवारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज है। पुलिस जांच में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका था कि तत्कालीन तहसीलदार और उनके अमले में शामिल पटवारियों ने मिलकर एक बड़ा षड्यंत्र रचा था। उन्होंने असली पीड़ितों को दरकिनार कर, कागजों पर फर्जी बाढ़ पीड़ित तैयार किए और करीब 2.5 करोड़ रुपये की सरकारी राशि अपने परिचितों और रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी थी।
तत्कालीन कलेक्टर ने दर्ज कराई थी FIR
जब यह महाघोटाला उजागर हुआ था, तब तत्कालीन कलेक्टर संजय कुमार के निर्देश पर बड़ौदा थाने में मामला दर्ज कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक, अब पुलिस को अदालत से गिरफ्तारी वारंट मिलते ही इन आरोपियों की धर-पकड़ तेज हो जाएगी। कानून की गिरफ्त में आने के साथ-साथ इन सभी 18 पटवारियों के खिलाफ निलंबन (Suspension) और विभागीय जांच की सख्त प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
– ब्यूरो रिपोर्ट, Zee Bharat news 24




