जी भारत न्यूज24
देवास। आनंद गुप्ता।
जप, तप, साधना, समाधि न हो अगर राम का नाम ले लिया तो जीवन के प्रारंभ से अंत तक जीवन में एक ही रस होगा वो है राम नाम। भगवान का नाम भगवान से बढ़कर है। दुष्टों का दमन करना, पाप का हरण भगवान के लिए छोटी बात है। भगवान ने जब भी अवतार लिया तब उन्होंने भक्तों का उद्धार ही किया है। सूर्यवंश में जन्म हुआ तो यज्ञ के प्रताप से और चंद्रवंश में हुआ तो युद्ध के कारण। राम का जन्म सूर्यवंश में हुआ था इसलिए चंद्रमा बहुत दुखी थे। उन्हें राम के दर्शन नहीं हो रहे थे। क्योंकि राम नवमी को 12 बजे सूर्य की साक्षी में जन्म हुआ था। चंद्रमा को जब राम के दर्शन नहीं होने से दुखी हुए तब प्रभु राम ने चंद्रमा को कहा था कि मैं अगला अवतार चंद्रवंश में लूंगा और इस अवतार में मेरे नाम के पीछे तेरा नाम रहेगा। सारा संसार मुझे रामचंद्र के नाम से जानेगा। राम सीधे है और कृष्ण टेढ़े है, कृष्ण का नाम भी टेढ़ा है और खड़े भी टेढ़े हैं। भगवान का जैसा रूप होता है वैसा ही उनका नाम होता है। दशरथ के चारों नंदनों का नामकरण संस्कार की व्याख्या करते हुए आपने कहा कि प्रभु राम का नाम जगत को तारने वाला है। लक्षमण सृष्टि का आधार है, भरत त्याग और समर्पण का नाम है, क्रोध, काम, मद का जो हरण कर ले उसका नाम शत्रुधन रखा गया। जीवन में भक्ति हो और ज्ञान नहीं हो तो अहंकार पैदा होता है, भक्ति तो जब जल में मिल जाती है चरणामृत बन जाती है। । आरती में विशेष रूप से सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य माधवानंद दुबे, महेश गर्ग, एस आई राजेश पटेल, किशोर गेहलोत, मनोहरसिंह ठाकुर, मोहनलाल शर्मा, बाबूलाल नरवरिया सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। व्यासपीठ की पूजा दीपक गर्ग, अनामिका गर्ग, जयेश गर्ग एवं प्राची गर्ग ने की। संचालन चेतन उपाध्याय ने किया ।




