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उन्नाव: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश को वर्ष 2027 तक पूरी तरह बाल श्रम मुक्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में शासन के निर्देशों पर जनपद स्तर पर नियमित रूप से उच्च स्तरीय समीक्षा और सघन अभियान चलाए जा रहे हैं।
पुरवा तहसील में संयुक्त टीम की बड़ी कार्रवाई
गुरुवार, 07 मई 2026 को जनपद की तहसील पुरवा में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत एक बड़ा संयुक्त सर्च अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होटलों, ढाबों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में काम कर रहे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना था।
अभियान में शामिल रही संयुक्त टीम:
श्रम विभाग: श्री राधे श्याम सिंह (श्रम प्रवर्तन अधिकारी, उन्नाव) और श्री इन्दीवर जोशी (श्रम प्रवर्तन अधिकारी, उन्नाव)।
पुलिस विभाग (AHTU): अनिल कुमार सिंह (सब इंस्पेक्टर) और पूजा (महिला कांस्टेबल)।
चाइल्ड हेल्पलाइन: दिवाकर ओझा एवं अम्बरीश।
03 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, 04 बच्चे हुए चिन्हित
संयुक्त टीम ने क्षेत्र के विभिन्न होटलों, रेस्टोरेंट्स और दुकानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान 03 प्रतिष्ठानों में बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम का उल्लंघन पाया गया।
कार्रवाई के दौरान कुल 04 बाल एवं किशोर श्रमिकों को चिन्हित कर अवमुक्त कराया गया।
नियमों का उल्लंघन करने वाले सेवायोजकों (मालिकों) के विरुद्ध मौके पर ही निरीक्षण टिप्पणी जारी की गई।
संबंधित सेवायोजकों के खिलाफ अब नियमानुसार कठोर विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
सेवायोजकों से अपील
श्रम विभाग के अधिकारियों ने जनपद के समस्त दुकानदारों और प्रतिष्ठान स्वामियों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में बच्चों से श्रम न कराएं। जनपद को बाल श्रम की कुप्रथा से मुक्त करने के लिए समाज और व्यापारियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।




