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Home » ​बुंदेलखंड में ‘बत्ती गुल’, जनता बेहाल: गर्मी और अनिद्रा से अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की कतारें
उत्तरप्रदेशप्रसाशन

​बुंदेलखंड में ‘बत्ती गुल’, जनता बेहाल: गर्मी और अनिद्रा से अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की कतारें

Zee Bharat News 24
Last updated: May 14, 2026 8:12 am
Zee Bharat News 24
3 Min Read

जी भारत न्यूज24 

झांसी/बुंदेलखंड

विशेष रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर (वरिष्ठ पत्रकार)

बुंदेलखंड। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ आसमान से बरसती आग और दूसरी तरफ बिजली विभाग की अघोषित कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में ‘गर्मी फुल, बिजली गुल और अनिद्रा फुल’ की स्थिति बनी हुई है।

नींद अधूरी, काम का बोझ भारी

वरिष्ठ पत्रकार देवेश प्रताप सिंह राठौर ने जब धरातल पर उतरकर लोगों का हाल जाना, तो दर्द छलक उठा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिन तो जैसे-तैसे कट जाता है, लेकिन रात होते ही कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है। रात भर बिजली आने-जाने के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है।

सबसे ज्यादा प्रभावित वे मजदूर और अल्प पूंजी वाले लोग हैं जो ‘रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं’। रात भर जागने के बाद सुबह थकान और भारी शरीर के साथ काम पर निकलना उनकी मजबूरी है, क्योंकि बिना काम किए परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है।

अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या

भीषण गर्मी और नींद की कमी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की तादाद ‘फुल’ हो चुकी है। कमजोरी, चिड़चिड़ापन और लू की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। खासकर गरीब वर्ग, जिनके पास इन्वर्टर या अन्य वैकल्पिक साधन नहीं हैं, वे इस बिजली संकट के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं।

सरकार से सीधी अपील: रात की बिजली रहे सुदृढ़

क्षेत्रीय जनता और पत्रकारिता जगत ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि बिजली व्यवस्था को लेकर एक व्यावहारिक नीति बनाई जाए।

दिन में भले ही कटौती हो: लोगों का मानना है कि यदि तकनीकी कारणों से कटौती जरूरी है, तो उसे दिन के समय कर लिया जाए।

रात को मिले निर्बाध आपूर्ति: रात के समय बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि आम आदमी चैन की निद्रा ले सके और अगले दिन पूरी ऊर्जा के साथ अपने काम पर जा सके।

पत्रकार का नजरिया

वरिष्ठ पत्रकार देवेश प्रताप सिंह राठौर का मानना है कि सरकार को कमजोर और गरीब वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। एक स्वस्थ समाज और मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है कि कामगार वर्ग शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहे, जो तभी संभव है जब उनकी बुनियादी जरूरतें (जैसे बिजली और नींद) पूरी हों।

Zee Bharat News 24 की राय: क्या आपके क्षेत्र में भी बिजली कटौती की यही स्थिति है? हमें कमेंट में बताएं और इस खबर को साझा करें।

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