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झांसी/बुंदेलखंड: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, लेकिन बुंदेलखंड के झांसी जिले से जो जानकारी सामने आ रही है, वह प्रशासनिक शुचिता पर गहरे प्रश्नचिह्न लगाती है। झांसी में कई विभागों के आला अधिकारियों की कार्यशैली और एक ही जनपद में लंबे समय तक जमे रहने को लेकर अब जनता और कर्मचारियों के बीच आक्रोश पनपने लगा है।
एक ही जिले में पति-पत्नी की तैनाती: नियम या रसूख?
सूत्रों और विभागीय कर्मचारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के कुछ कद्दावर अधिकारी पिछले कई वर्षों से झांसी में ही विभिन्न पदों पर तैनात हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अधिकारियों ने इसी जिले में रहते हुए पदोन्नति (प्रमोशन) भी प्राप्त की है। चर्चा का विषय यह भी है कि पति और पत्नी, दोनों ही झांसी में महत्वपूर्ण जिला स्तरीय पदों पर आसीन हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर किन नियमों के तहत एक ही परिवार के दो बड़े अधिकारियों को लंबे समय तक एक ही जिले में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं?
चेहरा देखकर काम करने के आरोप
अधिकारियों पर आरोप है कि वे ‘चेहरा देखकर’ काम करते हैं। स्थानीय लोगों और विभागीय स्टाफ का कहना है कि:
नियमों की अनदेखी: ऊँची पकड़ वाले और रसूखदार लोगों के काम बिना किसी नियम-कानून की परवाह किए तुरंत हो जाते हैं।
आम जनता की उपेक्षा: वहीं, जब कोई अपरिचित या आम नागरिक अपनी फरियाद लेकर पहुंचता है, तो उसे महीनों चक्कर कटवाए जाते हैं।
भ्रष्टाचार को बढ़ावा: लंबे समय तक एक ही जगह टिके रहने के कारण इन अधिकारियों का एक मजबूत गठजोड़ बन गया है, जिससे भ्रष्टाचार का ग्राफ बढ़ रहा है।
जांचों पर ‘पकड़’ का साया
विभागीय सूत्रों का दावा है कि इन अधिकारियों के खिलाफ कई आंतरिक जांचें भी चल रही हैं, लेकिन अपनी ऊंची रसूख और रसूखदार संपर्कों के कारण ये जांचें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी “मजबूत पकड़” के कारण प्रशासन उन पर हाथ डालने से कतराता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग
इस गंभीर मुद्दे को लेकर वरिष्ठ पत्रकार देवेश प्रताप सिंह राठौर ने मोर्चा खोला है। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से इस मामले को संज्ञान में लेने का विनम्र निवेदन किया है।
“भ्रष्टाचार समाज में नासूर बन चुका है। एक ही जिले में लंबे समय तक अधिकारियों की तैनाती शासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। मैंने मुख्यमंत्री जी से मिलने का समय मांगा है ताकि झांसी में व्याप्त इस प्रशासनिक अनिमितताओं और भ्रष्टाचारियों के सिंडिकेट से उन्हें अवगत करा सकूं।”
— देवेश प्रताप सिंह राठौर
स्थानांतरण ही एकमात्र समाधान?
जानकारों का मानना है कि जब तक इन रसूखदार अधिकारियों का झांसी से स्थानांतरण नहीं होता, तब तक निष्पक्ष जांच और जनहित के कार्य संभव नहीं हैं। अब देखना यह है कि क्या शासन इन ‘शक्तिशाली’ दंपत्ति अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है या फिर बुंदेलखंड की जनता इसी तरह रसूखदारी के साये में पिसती रहेगी।
रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर
ब्यूरो, झांसी




