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उत्तर प्रदेश | देवेश प्रताप सिंह राठौर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण करें तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री अनजाने में या किसी विशेष रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार को ही कमजोर करने का काम कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक ही मकसद दिखाई देता है—उत्तर प्रदेश के विकास पुरुष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की छवि और उनके पद को प्रभावित करना।
योगी की मजबूती और जनता का विश्वास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यों के आधार पर जनता के बीच जो ख्याति अर्जित की है, वह अत्यंत मजबूत है। उन्हें पद से हटाने या कमजोर करने की कोशिशें कई बार हुईं, लेकिन हर बार वे और अधिक प्रभावशाली होकर उभरे। योगी जी एक ऐसे समर्पित जननायक के रूप में देखे जाते हैं जिनके ‘कुर्ते में जेब नहीं’ होती, यानी वे पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार मुक्त और जनता के प्रति समर्पित हैं।
डिप्टी सीएम की कार्यशैली पर सवाल
लेखनी के माध्यम से जनता की राय सामने रखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रदेश की जनता दोनों उपमुख्यमंत्रियों की कार्यशैली से खुश नहीं है। आरोप यह भी है कि केंद्रीय नेतृत्व की कथित शह पर मुख्यमंत्री को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जो नेता स्वयं अपनी सीट जीतने में संघर्ष करते हैं, वे मुख्यमंत्री बनने का स्वप्न कैसे देख सकते हैं? ऐसे ‘भ्रष्ट’ और ‘स्वार्थी’ तत्वों के लिए योगी आदित्यनाथ जैसे निष्पक्ष व्यक्ति को हजम कर पाना मुश्किल हो रहा है।
बीजेपी के पतन की आहट?
आज देश के 16 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और कई जगह एनडीए गठबंधन की। लेकिन अहंकार और आंतरिक कलह किसी भी मजबूत संगठन के पतन का कारण बन सकती है। यदि शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश में इस ‘भीतरघात’ को नहीं रोका और योगी आदित्यनाथ के साथ किसी भी प्रकार की राजनीतिक छेड़खानी की, तो यह भारतीय जनता पार्टी के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।
विनाशकाले विपरीत बुद्धि
कहावत है कि ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’। आज उत्तर प्रदेश की जनता जनार्दन सब देख रही है। यदि समय रहते संगठन के भीतर सुधार नहीं किया गया और इन अंतर्विरोधों को समाप्त नहीं किया गया, तो भाजपा अपने ही हाथों अपने पतन का रास्ता सुनिश्चित कर लेगी। जनता सर्वोपरि है और वह हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर रखे हुए है।
नोट: यह लेखक के निजी विचार और जनता के बीच से जुटाए गए फीडबैक पर आधारित विश्लेषण है।




