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जबलपुर,मध्य प्रदेश: नर्मदा के सुरम्य जल में छुट्टियां मनाने और सुकून के कुछ पल बिताने आए पर्यटकों के लिए बरगी बांध का सफर काल बन गया। खमारिया द्वीप के पास हुए एक भीषण क्रूज हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई पर्यटक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह दर्दनाक घटना प्रशासन की भारी लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है।
पल में खुशियां बदलीं मातम में
मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश पर्यटन द्वारा संचालित इस क्रूज नाव में 43 पर्यटक सवार थे। खमारिया द्वीप के पास अचानक आए तूफान के बीच क्रूज का संतुलन बिगड़ गया और वह अशांत जल में समा गया। चश्मदीदों के अनुसार, यात्रियों को न तो सेफ्टी जैकेट दी गई थी और न ही नाव पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम थे।
मानवता को शर्मसार करती घटना
इस हादसे में सामने आई क्रूज पायलट की संवेदनहीनता ने सबको झकझोर कर रख दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि यात्रियों को बचाने के बजाय पायलट अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इस हृदय विदारक हादसे में एक मां का दृश्य सबसे अधिक विचलित करने वाला है, जिसने अंतिम क्षणों तक अपने 4 साल के बच्चे को अपनी बाहों में जकड़े रखा, लेकिन मौत की लहरों के आगे उनकी ममता भी हार गई।
उठ रही है सख्त कार्रवाई की मांग
इस त्रासदी के बाद स्थानीय नागरिकों और मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश है। देवेश प्रताप सिंह राठौर ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे ‘व्यवस्था की विफलता’ करार दिया है। उन्होंने सरकार से कड़े शब्दों में मांग की है:
जिम्मेदारों की बर्खास्तगी: घटना में शामिल किसी भी स्तर के कर्मचारी या अधिकारी को केवल ‘अटैच’ न किया जाए, बल्कि सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाए।
सुरक्षा में कोताही पर दंड: जिन लोगों ने सुरक्षा मानकों (जैसे लाइफ जैकेट) की अनदेखी की, उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
पायलट पर सख्त कार्रवाई: यात्रियों को छोड़कर भागने वाले पायलट के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिंदगी अनमोल है, सिस्टम को जागना होगा
यह हादसा यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इंसानी जान की कीमत केवल एक ‘लापरवाही’ बनकर रह गई है? जब पानी में डूबते व्यक्ति के पास बचने के लिए केवल चंद मिनट होते हैं, तब बचाव दल की देरी और सुरक्षा उपकरणों का अभाव सीधे तौर पर किसी की हत्या के समान है।
सरकार और पर्यटन विभाग को अब आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। यदि समय रहते व्यवस्थाओं को चुस्त और दुरुस्त नहीं किया गया, तो ऐसी दुखद घटनाएं परिवारों को उजाड़ती रहेंगी और मानवता पर सवालिया निशान लगाती रहेंगी।




