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नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर ‘देशव्यापी लॉकडाउन’ की खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं। इन दावों ने आम जनता के बीच चिंता और घबराहट पैदा कर दी है। लेकिन क्या वाकई सरकार 2020 जैसा सख्त कदम उठाने जा रही है? आइए जानते हैं क्या है असलियत।
सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय मंत्रियों (हरदीप सिंह पुरी और निर्मला सीतारमण) ने स्पष्ट किया है कि लॉकडाउन लगाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। * भ्रम की वजह: दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) के तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और ईंधन (Fuel) की स्थिति पर चर्चा की थी। उन्होंने देश को “कोविड जैसी एकजुटता और तैयारी” दिखाने का सुझाव दिया था ताकि आर्थिक चुनौतियों का सामना किया जा सके।
गलत व्याख्या: पीएम के इसी ‘तैयारी’ वाले बयान और लॉकडाउन की छठी बरसी (24 मार्च) के संयोग को जोड़कर सोशल मीडिया पर इसे लॉकडाउन की वापसी बताया जाने लगा।
लॉकडाउन की खबर: सच या अफवाह?
यह पूरी तरह से एक अफवाह है। सरकार के अनुसार:
देश में ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कोई कमी नहीं है।
कोरोना महामारी फिलहाल पूरी तरह नियंत्रण में है।
आर्थिक गतिविधियों, स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने की कोई योजना नहीं है।
अपील: केंद्र सरकार ने जनता से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें और पैनिक न फैलाएं। किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी चैनलों या विश्वसनीय समाचार माध्यमों पर ही भरोसा करें।




