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झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में सट्टे और लॉटरी के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सनसनी फैल गई है। हाल ही में आईपीएल के दौरान सट्टा गिरोह के पकड़े जाने के बाद, अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे ‘असली चेहरों’ को लेकर बहस छिड़ गई है।
दशक पुराना है जाल, छोटे मोहरों से बड़ी मछलियों तक का सफर
क्षेत्रीय जानकारों और सूत्रों की मानें तो झांसी में सट्टे और लॉटरी का यह काला कारोबार कोई नया नहीं है। यह धंधा यहाँ दो दशकों से अधिक समय से जड़ जमाए बैठा है। हालांकि, पुलिस द्वारा हाल ही में कुछ गिरफ्तारियां की गई हैं, लेकिन इसे केवल एक शुरुआत माना जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि पकड़े गए लोग महज मोहरे हैं, जबकि इस पूरे सिंडिकेट को चलाने वाली ‘बड़ी मछलियां’ अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं।
राजनीतिक संरक्षण और रसूख का खेल
चर्चा है कि इस अवैध व्यापार को मजबूत राजनीतिक हस्तक्षेप और संरक्षण प्राप्त है। लोगों का मानना है कि जिले में सट्टे का कारोबार कौन चला रहा है, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है—आम जनता से लेकर जिला प्रशासन तक, हर कोई इन चेहरे से वाकिफ है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब तक इन रसूखदार लोगों पर कार्रवाई से परहेज किया जाएगा?
क्या होगी निष्पक्ष जांच?
देवेश प्रताप सिंह राठौर ने इस पूरे मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा:
“अगर जांच सही दिशा में और निष्पक्ष हुई, तो कई बड़े और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आएंगे जो परदे के पीछे से इस कारोबार को संचालित कर रहे हैं। मुजरिम चाहे कितना भी रसूखदार और मजबूत क्यों न हो, वह कानून के दायरे से ऊपर नहीं हो सकता।”
अब प्रशासन और सरकार की परीक्षा
झांसी की जनता की नजरें अब सरकार और प्रशासन की कार्यवाही पर टिकी हैं। क्या शासन इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुँच पाएगा? या यह मामला भी केवल छोटे स्तर की गिरफ्तारियों के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन यह तय है कि अब इस अवैध व्यापार के खिलाफ सख्ती की मांग जोर पकड़ रही है।




