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उन्नाव। पुरानी पेंशन बहाली और आउटसोर्सिंग नीति के विरोध को लेकर सोमवार को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ सिंचाई विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने “29 नवंबर 2025 का शासनादेश वापस लो” और “पुरानी पेंशन बहाल करो” के नारे लगाते हुए सिंचाई विभाग कार्यालय से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला।
सुबह से ही सिंचाई विभाग परिसर में कर्मचारियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। संगठन के बैनर तले एकत्र हुए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना था कि पुरानी पेंशन बहाली उनकी वर्षों पुरानी मांग है, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। हाल ही में जारी शासनादेश से कर्मचारियों के हितों पर और चोट पहुंची है, इसलिए उसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। बता दे कि प्रदर्शन का नेतृत्व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष ने किया। उन्होंने कहा कि नई पेंशन स्कीम कर्मचारियों के साथ अन्याय है। सेवा समाप्त होने के बाद कर्मचारियों को आर्थिक असुरक्षा झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन नीति बहाल होने तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने डीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए “निजीकरण बंद करो आउटसोर्सिंग भर्ती खत्म करो” के नारे लगाए। उनका कहना था कि सरकार विभागों में नियमित नियुक्तियां बंद कर आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों का शोषण कर रही है। इससे न केवल नौकरी की स्थिरता खत्म हुई है बल्कि कर्मचारियों के अधिकार भी छीने जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान डीएम कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल बाद में जिलाधिकारी से मिला और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 29 नवंबर 2025 को जारी शासनादेश तत्काल वापस लिया जाए, पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए और आउटसोर्सिंग प्रणाली को समाप्त किया जाए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आगामी दिनों में पूरे जिले में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। कर्मचारी हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर नारे लगाते रहे “हमारा हक हमें दो, पुरानी पेंशन बहाल करो।” कर्मचारियों का कहना है कि अब यह आंदोलन केवल उन्नाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी होगा जब तक कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग पूरी नहीं होती।
शैलेंद्र प्रताप ने बताया कि एक 14वाँ संशोधन हुआ है कि जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को मृतकाश्रित (मृतक आश्रित) में हुआ है, तो जिसमें चतुर्थ श्रेणी कार्यरत है कर्मचारी, तो उसे उच्च स्तर से वह स्तर पे नहीं किया जा सकता है, क्योंकि अगर मर गया आदमी, तो उसके बच्चे को जितना पढ़ा-लिखा हो, उसको उसी चतुर्थ श्रेणी ही उस पे किया जाएगा। तो हमारी मांग यही है कि यह शासनादेश वापस किया जाए और जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्ति बंद है, उसे चालू किया जाए और पुरानी पेंशन बहाल की जाए और निजीकरण बंद किया जाए। यह हमने ज्ञापन आज जो है जिला अधिकारी महोदय जी को दिया है। यह हमारी मांग है।




