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उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड) | देवेश प्रताप सिंह राठौर
बुंदेलखंड: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सूरज की तपिश अब जानलेवा साबित होने लगी है। गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है और पारा 43 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुँच चुका है। लू के थपेड़ों और बढ़ते तापमान के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली बच्चे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
स्कूलों के समय में बदलाव की मांग
भीषण गर्मी को देखते हुए अब तक जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों के समय में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का मानना है कि विशेषकर प्राइमरी के छोटे बच्चों के लिए यह मौसम बेहद संवेदनशील है। प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि बुंदेलखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए तुरंत स्कूल के समय में परिवर्तन के निर्देश जारी करें।
व्यवस्थाओं पर सवाल: कागजी निर्देशों तक सीमित शासन?
गर्मी से राहत के लिए सरकारी स्तर पर प्याऊ की व्यवस्था और अन्य इंतजामों की जरूरत है। हालांकि, धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। अक्सर देखा जाता है कि एयर-कंडीशनर (AC) दफ्तरों और लग्जरी कारों में घूमने वाले बड़े अधिकारियों के निर्देश सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाते हैं। आम जनता का मानना है कि नीति निर्धारकों को गरीबों की जमीनी परेशानियों से शायद कोई सरोकार नहीं है।
मजबूरी और मेहनत: ‘पापी पेट का सवाल’
जहाँ रईस तबका एसी की ठंडक में सुरक्षित है, वहीं समाज का एक बड़ा हिस्सा भीषण धूप में पसीना बहाने को मजबूर है। ‘पापी पेट’ की आग बुझाने के लिए दिहाड़ी मजदूर और ठेले वाले 43 डिग्री की तपिश में भी काम कर रहे हैं।
“हाल ही में एक दृश्य ने दिल दहला दिया, जहाँ एक ठेले वाला लोहे की भारी सरिया को रस्से से कंधे पर लादकर खींच रहा था। पूछने पर बस इतना जवाब मिला- ‘बाबूजी, यह तो रोज का काम है’।”
भ्रष्टाचार और बढ़ती खाई: गरीब बनाम अमीर
समाज में आर्थिक असमानता का मुद्दा भी अब गर्म है। आम चर्चा है कि जहाँ एक ईमानदार मजदूर दिनभर पसीना बहाने के बाद भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करता है, वहीं राजनीति और प्रशासनिक पदों पर बैठे कुछ लोग कम समय में ही करोड़ों-अरबों की संपत्ति खड़ी कर लेते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या किसी अधिकारी की संपत्ति उसके वेतन के अनुपात में है? क्या गरीबों के हक का हिस्सा मारकर ही कुछ लोग अमीर बन रहे हैं?
सावधानी ही बचाव है
जब तक सरकारी तंत्र सक्रिय नहीं होता, तब तक लोगों को खुद भी सतर्क रहने की जरूरत है:
धूप में बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
बाहर निकलते समय सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखें।
पानी का पर्याप्त सेवन करें और संभव हो तो राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करें।
संपादन: न्यूज़ डेस्क
रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर




