जी भारत न्यूज24
झांसी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विशेष रूप से बुंदेलखंड इलाके में बिजली कटौती ने हाहाकार मचा रखा है। एक तरफ जनता बूंद-बूंद पसीने में तर होकर रातें जागकर काट रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर बेहद गैर-जिम्मेदाराना और नकारात्मक रवैया अपनाए हुए हैं।
अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: ‘हमें नहीं पता लाइट कब आएगी’
ग्राउंड जीरो से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक, जब पीड़ित जनता या सजग नागरिक बिजली कटौती की शिकायत के लिए सक्षम अधिकारियों को फोन लगाते हैं, तो उन्हें बेहद निराशाजनक और टालमटोल भरा जवाब मिलता है। अधिकारियों का व्यवहार इतना नकारात्मक है कि उन्हें खुद यह जानकारी नहीं होती कि किस क्षेत्र में बिजली आ रही है और कहाँ गुल है। ‘लाइट कब आएगी या क्यों कटी है’, इसका कोई स्पष्ट जवाब किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के पास नहीं है। अधिकारियों की यह बेरुखी जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है।
पूरे प्रदेश में कटौती, लेकिन बुंदेलखंड में हालात सबसे बदतर
वैसे तो बिजली की अघोषित कटौती का असर उन्नाव, कानपुर, कन्नौज, औरैया और हरदोई समेत कई अन्य शहरों में भी देखा जा रहा है, लेकिन बुंदेलखंड के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। झांसी, ललितपुर और जालौन जिलों में, विशेषकर झांसी मंडल में बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
जनता पर दोहरी मार: मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार हो रहे लोग
दिनभर काम के बोझ और भीषण थकावट के बाद जब लोग रात में आराम करने घर लौटते हैं, तो बिजली गुल मिलती है। रात-रात भर बिजली न रहने के कारण लोग सो नहीं पा रहे हैं। नींद पूरी न होने और अत्यधिक गर्मी के कारण स्थानीय नागरिक अब मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार हो रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री की कार्यशैली पर सवाल, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
वर्तमान हालातों को देखते हुए सरकार के ऊर्जा मंत्री की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिजली संकट को दूर करने में ऊर्जा विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जागरूक नागरिकों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से विशेष निवेदन किया है कि:
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव बेहद नजदीक हैं और बिजली का यह संकट सीधे तौर पर चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है। जनता का आक्रोश बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री जी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऊर्जा विभाग को विशेष रूप से स्वयं अपने नियंत्रण (पास) में लें ताकि लापरवाह अफसरों पर लगाम कसी जा सके और जनता को इस नरकीय स्थिति से निजात मिल सके।




