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स्वरूप विद्या निकेतन परिसर में हो रहा है श्रीराम कथा का वाचन
भिण्ड । चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की कथा का रसपान करा रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ महाराज ने शहर के अटेर रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित स्वरूप विद्या निकेतन परिसर में श्रीराम कथा का वाचन करते हुए कथा का अक्षुण प्रवाह बहा।
स्वामी जी ने कहा कि रामायण में प्रसंग आया है कि रावण, कुम्भकरण एवं विभीषण ने घनघोर तपस्या की। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने तीनों की अत्यंत प्रशंसनीय तपस्या को देखकर आशीर्वाद देने की इच्छा प्रकट की। तब रावण ने साभिमान वशात वर मांगते हुए कहा कि प्रभु मैं नर और बानर को कुछ नहीं समझता हूं, अतः इनसे मुझे कोई हानि नहीं है। इनसे अतिरिक्त कोई दैवीय शक्ति या अन्य मेरे संहार की अवश्यंभावी कारण न बने । चतुर्मुखी ब्रह्मा ने विचार करके आशीर्वाद दे दिया । कालान्तर में नर रूप में नारायण और वानर रूप
धरे देवताओं ने रावण और उसकी लंका का सम्पूर्ण विनाश किया।
वशिष्ठ के निर्देशन से पुत्रेष्टि यज्ञ का सम्पादन श्रृंगी त्रऋषि द्वारा हुआ। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ में वेद मंत्रों द्वारा आहुतियां दी गईं। भगवान विष्णु यज्ञगत चारु में प्रविष्ट हो गए। अग्नि भगवान ने यज्ञान्त में प्रगट होकर खीर चारू प्रदान किए और कहा कि जाओ इसी से तुम्हारी अभीष्ट इच्छा पूर्ण होगी।
रामायण मे गोस्वामी जी कहते हैं, अरध भाग कौसल्यहिं दीन्हा उभय भाग आधे कर लीन्हा । चारों अंशानुसार तीनों रानियों ने दिव्यता का आधान किया। साक्षात भगवान श्री विष्णु ने दशरथ जी का पुत्र भाव स्वीकार किया। साथ ही ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को श्रीहरि की सेवा हेतु पृथ्वी लोक पर अवतरित होने का आदेश दिया। कथा आरंभ के पूर्व मां अन्नपूर्णेश्वरी वेद अनुसंधान संस्थान के आचार्य एवं बटुकों के द्वारा गुरुदेव की पादुका पूजन संपादित की गई। श्रीराम कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं




