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वृन्दावन/मथुरा (उत्तर प्रदेश)।
छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले कांग्रेस के सोशल आउटरीच विभाग (मथुरा) के जिलाध्यक्ष दीपक पाराशर को पुलिस ने उनके वृन्दावन स्थित आवास पर हाउस अरेस्ट (गृह नजरबंद) कर दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में रोष व्याप्त है।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना अपराध नहीं: दीपक पाराशर
हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद कांग्रेस नेता दीपक पाराशर ने सरकार और प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। मीडिया को बयान (बाइट) देते हुए उन्होंने कहा:
“लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ उठाना कोई अपराध नहीं है। यदि किसी नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन या प्रदर्शन में भाग लेने से पहले ही उसके घर में रोक दिया जाता है, तो यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।”
‘जनता की आवाज़ दबाने के बजाय संवाद करे सरकार’
दीपक पाराशर ने आगे कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाने के बजाय सरकार को संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में पूरा विश्वास रखते हैं और जनहित तथा अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
स्थान: वृन्दावन (मथुरा), उत्तर प्रदेश
रिपोर्ट: आनंद पचौरी (वृंदावन)




