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झांसी: बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी ने अपने शैक्षणिक ढांचे में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। भारत सरकार के राष्ट्रीय सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग (नई दिल्ली), उत्तर प्रदेश राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख परिषद् और उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बड़ा फैसला लिया है।
विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (BMLT) कार्यक्रम में व्यापक संशोधन करते हुए इसे अब पूर्णतः राष्ट्रीय पाठ्यचर्या एवं नियामक ढांचे के अनुरूप लागू करने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज़ ने इस नवीन पाठ्यक्रम और विनियमों को अपनी मंजूरी दे दी है।
📌 मुख्य बदलाव: एक नज़र में
नये नियमों के तहत पाठ्यक्रम की रूपरेखा, नाम और अवधि में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
नया नाम: अब इस कार्यक्रम को बैचलर ऑफ साइंस इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (टेक्नीक्स) के स्थान पर बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (BMLS) के नाम से जाना जाएगा।
सेमेस्टर प्रणाली और क्रेडिट: यह कोर्स अब पूरी तरह सेमेस्टर प्रणाली पर आधारित होगा, जिसमें कुल 8 सेमेस्टर होंगे। इसकी कुल शैक्षणिक संरचना 160 क्रेडिट की होगी।
इंटर्नशिप की अवधि बढ़ी: सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप में किया गया है। पहले इंटर्नशिप की अवधि 6 महीने की थी, जिसे अब बढ़ाकर 1 वर्ष (40 क्रेडिट) कर दिया गया है।
कोर्स की कुल अवधि: इंटर्नशिप का समय बढ़ने के कारण अब यह कोर्स 3 वर्ष + 6 माह के स्थान पर इंटर्नशिप सहित कुल 4 वर्ष का होगा। डिग्री केवल इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद ही मिलेगी।
🎓 प्रवेश के लिए अनिवार्य पात्रता (Eligibility)
नए सत्र से प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए निम्नलिखित मानक तय किए गए हैं:
आयु सीमा: प्रवेश के समय न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए, या प्रवेश वर्ष के 31 दिसम्बर तक अभ्यर्थी 17 वर्ष की आयु पूर्ण करता हो।
शैक्षणिक योग्यता: अभ्यर्थी ने इंटरमीडिएट (10+2) या इसके समकक्ष परीक्षा भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) एवं जीवविज्ञान (Biology – वनस्पति व प्राणी विज्ञान) विषयों के साथ उत्तीर्ण की हो।
🔍 पुराने छात्रों पर क्या होगा असर?
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 और उसके बाद प्रवेश लेने वाले छात्रों पर ही लागू होंगे। शैक्षणिक सत्र 2025-26 या उससे पहले प्रवेश ले चुके सभी विद्यार्थी अपने पुराने पाठ्यक्रम, नियमावली और परीक्षा प्रणाली के तहत ही अपनी पढ़ाई और परीक्षा पूरी करेंगे।
📈 इस बदलाव का उद्देश्य और लाभ
यह संशोधन केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य छात्रों को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है।
पंजीकरण में आसानी: कोर्स पूरा होने के बाद छात्रों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर व्यावसायिक पंजीकरण (Registration) प्राप्त करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
आधुनिक पाठ्यक्रम: नए सिलेबस में आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों, नैदानिक कौशल (Clinical Skills), अनुसंधान, नैतिक मूल्यों, रोगी सुरक्षा और अस्पताल आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण को शामिल किया गया है।
रोजगार के बेहतर अवसर: देशभर में पाठ्यक्रम की एकरूपता होने से छात्रों को उच्च शिक्षा और नौकरियों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
💬 कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय का बयान
इस ऐतिहासिक निर्णय पर बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा:
“बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय सदैव गुणवत्तापूर्ण एवं राष्ट्रीय मानकों पर आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। राष्ट्रीय सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग द्वारा निर्धारित नए मानकों के अनुरूप मेडिकल लेबोरेटरी साइंस कार्यक्रम का पुनर्गठन विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे हमारे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, व्यावसायिक दक्षता तथा परिषदों में पंजीकरण प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी।”
रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर




