जी भारत न्यूज24
उत्तर प्रदेश में गर्मी को देखते हुए प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की छुट्टी 30 जून तक बढ़ा दी गई है, परंतु शिक्षा सचिव का जो निर्णय है, शिक्षक स्कूल जाएंगे और जो भी पेंडिंग काम है उसे पूरा करें वैसे जबरदस्ती का यह आदेश है, क्योंकि बच्चों की छुट्टी जब घोषित हो गई है शिक्षकों को स्कूल खोल कर बैठना उचित नहीं दिखाई देता,क्योंकि वहां शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए जाते हैं, जब बच्चे नहीं है तो शिक्षक ऐसा कौन सा काम है स्कूल में जिसको 15 दिन तक वह पूरा करें मुझे लगता है यह निर्णय इस तरह का है जैसे की छुट्टी बच्चों को दी जाती है ना की टीचर को यह बात सही है, परंतु फिर भी शिक्षकों का लाभ बच्चों के साथ जोड़कर प्रदान करना चाहिए क्योंकि शिक्षक स्कूल तो जाएगा लेकिन इतनी देर बिना बच्चों के पढ़ाई के क्या करेंगे यह एक प्रश्न उठता है, लोग कहते हैं कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों के साथ द्वैसता पूर्ण नीति अपनाई जाती है। शिक्षकों को हर जगह ड्यूटी पर लगा दिया जाता है जिले का कोई भी काम हो बिना शिक्षक के पूरा नहीं होता ऐसा शिक्षकों का कहना है। बहुत सारे शिक्षक लंबा सफर तय करके अपने स्कूल जाते हैं ग्रामीण क्षेत्र में, मुझे लगता है यह निर्णय शिक्षकों को जाने के लिए कहा गया है, वह आदेश का पालन करेंगे और स्कूल जाएंगे क्योंकि आदेश है, नौकरी सबको प्यारी होती है, परंतु इस तरह का निर्णय आपको काम हो या ना हो स्कूल में इतने घंटे खोल कर बैठना ही होगा, यह एक निर्णय मुझे लगता है ठीक नहीं इस पर विचार करने की जरूरत है।
देवेश प्रताप सिंह राठौर,ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




