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गोपाल बसेड़िया
भिण्ड । अटेर जनपद के ग्राम चौकी (धरई) स्थित सिद्ध पुरुष ताल का मंदिर परिसर में नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण की कथा के पांचवे दिन प्रवचन करते हुए श्रीश्री 1008 महामण्डलेश्वर रामभूषण दास महाराज (खनेता धाम) ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का प्रसंग का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि विवाह संस्कार पवित्र संस्कार है , लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। उन्होंने शिव पार्वती के विवाह की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि माता पार्वती हिमालय राज के यहां पर अवतरित हईं थीं। पार्वती बचपन से ही भगवान भोलेनाथ को मानती थीं। इसीलिए भोलेनाथ से माता पार्वती का विवाह हुआ। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ व माता पार्वती के विवाह के पहले से ही तारकासुर राक्षस का तीनों लोकों में अत्याचार था और उसका वध भोलेनाथ व माता पार्वती के पुत्र से होना था। इसीलिए भोलेनाथ व माता पार्वती का विवाह पहले से ही होना तय था यानी यह सब लीला भगवान की थी।
प्रवचन करते हुए रामभूषण दास महाराज ने कहा कि पार्वती माता ने नारद के कहने से तीन हजार वर्ष तक सूखी वेलपत्री खाकर कठोर तपस्या की। हिमाचल राजा की कन्या उमा के साथ भगवान भोले नाथ ने विवाह किया। भोलेनाथ की दिव्य बारात में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, लोकपाल देवता विवाह में सम्मिलित हुए। हिमालय ने ढोल-नगाड़ों के साथ में भगवान की बरात की अगवानी की। कथा में भूतों की टोली के साथ नाचते गाते हुए शिव जी बरात आई। बरात का भक्तों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। पार्वती की मां मैना ने जब शिव के विकट रूप को देखा तो मोहित हो गई। नारद जी ने उनको शिव तत्व का ज्ञान दिया, उसके बाद शिवा शिव का विवाह हुआ। कथा आयोजक ओंकारनाथ ओमप्रकाश कांकर हैं। कथा का समय दिन में 12 बजे से शाम पांच बजे तक है। कथा का समापन नौ जून रविवार को पूर्णाहुति एवं भण्डारे के साथ होगा। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रोतागणों ने शिव महापुराण की कथा का श्रवण किया।




