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बांगरमऊ (उन्नाव)।
उन्नाव जिले के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र में हुए बहुचर्चित संत मिलन दास हत्याकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने नामजद आरोपियों से पूछताछ के बाद तीन लोगों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। हालांकि, घटना का मुख्य आरोपी इसराइल अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है।
इस पूरी कार्रवाई के बाद नगर में एक नई चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि जेल भेजे गए लोगों में वे नाम भी शामिल हैं जिन्होंने घायल संत को अस्पताल पहुंचाया था।
क्या था पूरा मामला?
बीते मंगलवार को मोहल्ला घूरे टोला के रहने वाले संत मिलन दास अपने किसी काम से पूरबिया टोला में परिचितों से मिलने गए थे। आरोप है कि जब वह वहां से वापस लौट रहे थे, तभी इसराइल नामक युवक ने उनकी पीठ पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू लगने से संत मिलन दास लहूलुहान होकर वहीं गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
मदद करने वाले ही पहुंच गए जेल!
घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद स्थानीय सभासद अतीक खान, शफी और लल्ली ने इंसानियत दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल संत को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया। हालांकि, वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद मृतक के भाई वीरेंद्र सिंह ने कोतवाली में तहरीर दी, जिसमें मुख्य आरोपी इसराइल, शानू और यामीन को नामजद किया गया। इस तहरीर में लल्ली और शफी का उल्लेख केवल घायल संत के साथ मौजूद रहने और उनकी मदद करने वाले व्यक्तियों के रूप में किया गया था। लेकिन पुलिस ने तहरीर के आधार पर सभी पांच लोगों को आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया।
इन तीन आरोपियों को भेजा गया जेल
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान किया और अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया:
लल्ली (पुत्र दुर्गादीन, निवासी- मोहल्ला गुलाम मुस्तफा)
यामीन (पुत्र जाबिर, निवासी- मोहल्ला पूरबिया टोला)
शफी (पुत्र जान मोहम्मद, निवासी- मोहल्ला पूरबिया टोला)
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, लोगों में असमंजस
मदद करने वालों को ही आरोपी बनाकर जेल भेजे जाने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
नगरवासियों का कहना है:
“एक तरफ शासन और न्यायालय हमेशा यह संदेश देते हैं कि सड़क दुर्घटना या किसी भी वारदात में घायलों की मदद करने वालों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लेकिन अगर घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों को ही आरोपी बनाकर जेल भेज दिया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी किसी तड़पते हुए व्यक्ति की मदद करने के लिए आगे आने से कतराएगा।”
पुलिस का पक्ष
इस पूरे घटनाक्रम और उठ रहे सवालों पर पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की विवेचना पूरी तरह से साक्ष्यों (Evidences) के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मुख्य आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है।




