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रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया है। 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज टीएमसी और ममता बनर्जी सरकार का पतन अब लगभग निश्चित हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में ऐतिहासिक और बंपर जीत दर्ज करते हुए सत्ता के सिंहासन के बेहद करीब पहुंच गई है।
क्यों हुआ टीएमसी का पतन?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता सरकार का हिंदुओं के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया और कथित अत्याचार ही उनकी हार का मुख्य कारण बना। राज्य में सनातन और हिंदुत्व के विरोध की नीति टीएमसी पर भारी पड़ गई। जनता का आक्रोश स्पष्ट रूप से चुनावी नतीजों में दिखाई दे रहा है। यह परिणाम एक संदेश है कि भारत के किसी भी कोने में अगर सनातन का विरोध होगा, तो ऐसी सरकार का औंधे मुंह गिरना तय है।
क्या बंगाल को मिलेगा ‘योगी मॉडल’?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बंगाल की बागडोर किसके हाथ में होगी? हालांकि, इसका अंतिम निर्णय भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लेगा, लेकिन राज्य की जनता की मांग कुछ और ही इशारा कर रही है। लोगों के बीच किए गए सर्वे में एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है—उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
जनता का मानना है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है, वैसी ही सख्ती और कार्यशैली की आज पश्चिम बंगाल को सख्त जरूरत है। लोगों का कहना है कि टीएमसी के 15 वर्षों के शासन में जो गुंडागर्दी और अराजकता पनपी है, उसे केवल योगी आदित्यनाथ ही ठीक कर सकते हैं। वे बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने और राज्य में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा माने जा रहे हैं।
भाजपा के सामने चुनौतियां और जनता की उम्मीदें
बंगाल के साथ-साथ असम और पुडुचेरी में भी भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा है। लेकिन अब असली चुनौती जनता के भरोसे को कायम रखने की है। बंगाल की जनता को भाजपा से कई उम्मीदें हैं:
अतिक्रमण से मुक्ति: टीएमसी शासन के दौरान हिंदुओं की जो संपत्तियां और जमीनों पर कब्जे हुए हैं, उन्हें भाजपा जल्द से जल्द मुक्त कराए।
घुसपैठियों पर कार्रवाई: राज्य में बसे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें तत्काल बाहर भेजा जाए।
न्याय और सुरक्षा: टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई भाजपा कार्यकर्ताओं और हिंदुओं की हत्याओं के दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए। पश्चिम बंगाल की जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी इन उम्मीदों पर कैसे खरा उतरती है और राज्य को किस नई दिशा में ले जाती है।
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