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बांगरमऊ, उन्नाव | 28 अप्रैल, 2026 ब्यूरो रिपोर्ट: नगर संवाददाता
बांगरमऊ (उन्नाव)। नगर के प्रमुख मार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। हरदोई-उन्नाव मार्ग से लेकर संडीला मार्ग तक, दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध कब्जे के कारण शहर में सुबह से शाम तक जाम की स्थिति बनी रहती है। रेंगते वाहनों और शोर-शराबे के बीच राहगीरों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या से आंखें मूंद कर बैठे हैं।
दुकानदारों का ‘किराया खेल’: सड़क तक फैली दुकानें
नगर के हरदोई-उन्नाव, संडीला, लखनऊ और बिल्हौर मार्गों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। आरोप है कि मार्गों के किनारे स्थित दुकानदार अपनी दुकानों के सामने सड़क पर अवैध रूप से ठेले और खोमचे लगवाते हैं। इसके बदले इन दुकानदारों द्वारा ‘अवैध किराए’ के रूप में मोटी रकम वसूली जाती है। व्यापारियों ने सड़क के दोनों किनारों पर दुकानें इस कदर फैला ली हैं कि कई स्थानों पर आधी से अधिक सड़क ही गायब हो गई है।
तहसील मार्ग का बुरा हाल, अधिकारियों की अनदेखी
हैरानी की बात यह है कि संडीला मार्ग, जहां तहसील कार्यालय स्थित है, वहां भी अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। इसी रास्ते से प्रतिदिन उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) सहित कई बड़े अधिकारी गुजरते हैं। अधिकारियों की नाक के नीचे लगने वाले इस जाम ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जब अधिकारी स्वयं इस नरकीय स्थिति को देखते हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं करते?
आपातकालीन सेवाएं भी हो रहीं प्रभावित
भीषण जाम के कारण न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि एम्बुलेंस और दमकल जैसे आपातकालीन वाहनों के लिए भी रास्ता नहीं बचता। वाहनों के बीच होने वाली कहासुनी और विवाद अब रोज की बात हो गई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन कभी-कभार अतिक्रमण हटाओ अभियान तो चलाता है, लेकिन वह महज एक ‘फोटो खिंचवाने’ वाली औपचारिकता बनकर रह जाता है। अभियान के कुछ घंटों बाद ही स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है।
स्थायी समाधान की मांग
नगरवासियों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि:
अतिक्रमणकारियों के खिलाफ केवल जुर्माना नहीं, बल्कि कठोर विधिक कार्रवाई की जाए।
सड़कों के चिन्हांकन के साथ स्थायी रूप से डिवाइडर या बैरिकेडिंग की व्यवस्था हो।
ठेले और खोमचे वालों के लिए वेंडिंग ज़ोन तय किया जाए ताकि यातायात बाधित न हो।
निष्कर्ष: बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव के बीच यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बांगरमऊ की सड़कें पूरी तरह दम तोड़ देंगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जन समस्या को प्राथमिकता देता है या फिर नगरवासी इसी तरह जाम के झाम में पीसते रहेंगे।




