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कठिन परिस्थितियों में देवदूत बनेंगे ये जांबाज: एसडीईआरएफ ने दिया ध्वस्त संरचनाओं से रेस्क्यू करने का लाइव डेमो।
भिंड, 28 मार्च 2026। प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के समय त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भिंड जिले में एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आयोजित 3 दिवसीय विशेष ‘भूकंप आपदा जोखिम प्रबंधन एवं ध्वस्त संरचना, खोज एवं बचाव प्रशिक्षण’ कार्यक्रम के तहत शासकीय आईटीआई भिंड में दो दिनों का सघन प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह विशेष शिविर 27 मार्च और 28 मार्च 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें आपदा के समय लोगों की जान माल की रक्षा करने की बारीकियां सिखाई गईं।
विभिन्न विभागों के 80 से अधिक जांबाज हुए शामिल
इस अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शासकीय और सामाजिक क्षेत्रों के 80 से अधिक उत्साही प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें एमजेएस कॉलेज के प्रोफेसर्स, विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के डॉक्टर्स, जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी, नेहरू युवा केंद्र के जांबाज सदस्य, पुलिस विभाग के जवान, होमगार्ड और एसडीईआरएफ (SDERF) की टीमें शामिल रहीं। सभी प्रतिभागियों ने बेहद सक्रियता के साथ इस जीवन रक्षक प्रशिक्षण में भाग लिया।
दिखाए गए लाइफ सेविंग डेमो
प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर्स द्वारा आपदा प्रबंधन की बुनियादी और बेहद जरूरी जानकारियां साझा की गईं। इसमें मुख्य रूप से:
भूकंप के अचानक आने पर तत्काल बचाव के क्या उपाय होने चाहिए।
आपातकालीन और बेहद नाजुक परिस्थितियों में सूझबूझ से किए जाने वाले काम।
आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों की संक्षिप्त जानकारी।
सिद्धांतों को समझाने के बाद ग्राउंड पर विभिन्न अत्याधुनिक आपदा प्रबंधन उपकरणों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन (प्रदर्शन) कर उनके सही और त्वरित उपयोग की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई।
इन अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुआ सफल आयोजन
यह पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सक्रिय सहयोग से एसडीईआरएफ (SDERF) की प्रोफेशनल टीम द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम को नोडल अधिकारी विपिन सोनकर (कार्यपालन यंत्री, भवन लोक निर्माण विभाग संभाग भिंड) एवं सहायक नोडल अधिकारी व मुख्य प्रशिक्षक प्लाटून कमांडर ब्रजमोहन सिंह नरवरिया की देखरेख में कुशलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
शिविर के अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों को आवश्यक ट्रेनिंग मटीरियल (सामग्री) बांटी गई और उनके लिए स्वल्पाहार की भी विशेष व्यवस्था की गई थी।




