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नार्मल स्कूल मैदान में पंचम मोक्षदायिनी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन परमपूज्य संत श्री राम शरण शास्त्री जी महाराज ने कृष्ण जन्म की दिव्य कथा सुनायी। कृष्ण जी का जन्म मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ था, क्योंकि उनके मामा, अत्याचारी राजा कंस को भविष्यवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान उसे मारेगी, इसलिए कंस ने उन्हें कैद कर लिया था.जन्म के समय, दिव्य चमत्कार हुए, वासुदेव कृष्ण को सिर पर रखकर यमुना पार करके गोकुल ले गए और यशोदा के यहाँ छोड़ा, और उनकी कन्या को वापस ले आए, ताकि कंस को धोखा दे सकें. कंस ने कन्या को मारने की कोशिश की, लेकिन वह देवी दुर्गा का रूप ले निकली और चेतावनी दी कि उसका काल आ चुका है, जिससे कृष्ण की बुराई पर जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ। कथा परिसर को बड़े आकर्षक ढंग से वृन्दावन के जैसा सजाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने झूमते गाते नंदोत्सव मनाया और राजेश अलबेला के भजन मंडल ने सुमधुर बधावा गायन कर सबको आत्ममुग्ध किया। बाल गोपाल की झांकी का दर्शन कर सबने न्योछावर किया।
मुख्य यजमान डॉ संजय मिश्रा, बबली मिश्रा, दिवस यजमान ममता द्विवेदी व गोविंद शुक्ला सहधर्मिणी लाता, संयोजक पवन निगम, रश्मि निगम, आशीष निगम, लता निगम, नीरज निगम, सुबोध अस्थाना, डॉ प्रभात सिन्हा, वेंकट मिश्रा, हिमा मिश्रा, अखिलेश अवस्थी, वंदना अवस्थी, नीलम त्रिपाठी, मीडिया प्रमुख डॉ मनीष सेंगर, अशोक रस्तोगी, अरविंद श्रीवास्तव, राहुल कश्यप, आदि सहित महिला मंडल अध्यक्ष निम्मी अरोड़ा, संजय राठी, ममता राठी, अनुराग राठौर ने कथा प्रारम्भ और विश्राम की आरती में भाग लिया। आचार्य शिवम मिश्र ने विशिष्ट जनों का परिचय कराया और वृन्दावन में महाराजश्री द्वारा निर्मित कराए जा रहे दिव्य आश्रम में योगदान के लिए उन्नाव वासियों का आवाहन किया। डॉ मनीष सेंगर और अशोक रस्तोगी ने बताया जो सुधिजन कथास्थल नहीं पहुंच पा रहे वे सनातन परिवार यू ट्यूब चैनल पर कथा का लाइव प्रसारण अपने घर अथवा संस्थान में बैठ कर देख सकते है।




