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भारत देश में और उत्तर प्रदेश सहित SIR कई राज्यों में हो चुका है कई राज्यों में चल रहा है। इस पर सुनने में आता है कि वरिष्ठ अधिकारी गण BLO को परेशान करते हैं। अगर काम करने को कहा जाता है उस स्थिति में अगर कोई आत्महत्या कर लेता है या किसी कारण अपनी मौत को दावत देता है, तो यह गलत है काम करिए अगर आपको दिक्कत हो रही है तो अपनी बात रखिए आत्महत्या करना यह समस्या का समाधान नहीं है, आत्महत्या करके आप सिद्ध कर रहे हैं कि आप अपने दायित्वों को निर्वाह न करने के कारण अपने मौत का रास्ता तय किया, SIR का जो काम है वह इतना परेशानी दायक नहीं है इसमें आपको आत्महत्या करना पड़े सरकारी विभाग अधिक तर देखने में आया है काम कम करते हैं जब कभी काम का बोझ आ जाता है, तो परेशान हो जाते हैं ऐसा नहीं होना चाहिए जितना शरीर में दम है जितनी सरकार आपको सेलरी दे रही है उस आधार पर आप कार्य करिए और अधिकारी भी देखता है कि हमारा कर्मचारी मेहनत से कम कर रहा है तो मुझे लगता है वह भी सपोर्ट करता है, ऐसा नहीं है कि वह आंख में पट्टी बांधकर आपको मरने को छोड़ दे ऐसा नहीं होता है, अधिकारी भी इंसान होते हैं मैं किसी का पक्ष में नहीं लिख रहा हूं, लेकिन इतना जरूर कहता हूं अनुभव के आधार पर अगर आप अच्छा काम करते हैं तो उसका परिणाम अधिकारी अच्छा देता है, और अगर आप काम करने में काम चोरी करते हैं तो उसका फर्ज होता है क्योंकि उसकी जवाब देही होती है अगर वह डांटता है दुपट्टा है तो आप आत्महत्या करें ऐसा करना उचित नहीं, काम करिए अगर काम नहीं हो पता तो अपनी बात रखिए आजकल मीडिया है मीडिया के माध्यम से आप अपनी बात रख सकते हैं, पत्र के माध्यम से आप वरिष्ठ लोगों को अपनी बात पहुंचा सकते हैं, परंतु आत्महत्या करना यह कायरतापूर्ण निर्णय है इसे मैं सही नहीं समझता। आत्महत्या करके आप अपने परिवार को कितना कठिनाई में डाल रहे हैं, अपनी परेशानी को समाप्त करके और कितनी परेशानियां बढ़ा के आप जा रहे हो इस पर कभी ध्यान देना चाहिए मैं हमेशा आत्महत्या का विरोधी हूं, आत्महत्या वही करते हैं जो अपनी जिम्मेदारी और अपने कार्यों के प्रति समर्पित नहीं है और कायरतापूर्ण निर्णय ले लेते हैं और मृत्यु के और जाकर आत्महत्या कर लेते हैं, ऐसे लोगों को मैने ना कभी समर्थन किया है और ना मै करता हूं।
देवेश प्रताप सिंह राठौर ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




