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भिंड। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों को केंद्र में रखकर लिखी गई ‘उड़ चल अपने देस’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकता का घोष है। वर्तमान में रक्षा मंत्रालय में निदेशक की भूमिका निभा रहे भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के आयुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी अभिषेक चौहान ने अपनी इस नई पुस्तक के माध्यम से अपने गहन अनुभवों, सामाजिक अवलोकनों और सांस्कृतिक सरोकारों को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है।
चंबल-यमुना दोआब की मिट्टी से उपजी है संवेदना
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पालन-पोषण व प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले अभिषेक चौहान का बचपन चंबल-यमुना दोआब के समृद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में बीता है। यही वजह है कि लेखक का ग्रामीण परिवेश से गहरा जुड़ाव और भारतीय दर्शन के प्रति अनुराग पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में जीवंत रूप से महसूस होता है। प्रकृति, भारतीय दर्शन, ग्रामीण जीवन और सामाजिक चेतना उनकी इस लेखनी के प्रमुख स्तंभ हैं।
पुस्तक के केंद्र में हैं ये महत्वपूर्ण विषय
यह पुस्तक आज के समय के उन ज्वलंत विषयों को छूती है जिन पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है:
ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर: गाँवों के बदलते स्वरूप और विकास की कहानी।
सांस्कृतिक उदासीनता: इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति युवा पीढ़ी में बढ़ती उदासीनता पर विमर्श।
पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने की आवश्यकता।
मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियाँ: आधुनिक जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अहम मुद्दे।
राष्ट्र निर्माण: देश के विकास में एक आम नागरिक की भूमिका और उत्तरदायित्व।
“युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है यह पुस्तक”
‘उड़ चल अपने देस’ विशेष रूप से आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत साबित होगी। यह पुस्तक बहुत ही सरल और प्रभावी ढंग से यह संदेश देती है कि राष्ट्र सेवा केवल बड़े पदों पर आसीन होकर या असाधारण कार्यों से ही नहीं की जाती, बल्कि दैनिक जीवन में किए गए छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयासों से भी राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।




