कलेक्टर सजीव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में महिला सशक्तिकरण सप्ताह अंतर्गत कार्य स्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के तहत प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।
भिन्ड । कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने सभी कार्यालय प्रमुख से कहा है कि ऐसे आने वाली शिकायतें और शिकायत के संबंध में संपूर्ण कारवाइयां पूर्णता गोपनीय रखी जाएगी इनका किसी भी स्तर पर खुलासा नहीं किया जाएगा और समिति से मिलने वाली सिफारिश के आधार पर नियुक्त दोषी कर्मचारियों पर कार्यवाही करेंगे यदि नियोक्ता के विरुद्ध प्राप्त शिकायत है तो उसका प्रकरण कलेक्टर महोदय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और उसे शासकीय कर्मचारी पर सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कार्यवाही की जावेगी।
कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय जैन द्वारा कार्य स्थल पर महिलाओं की लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया गया कि यह अधिनियम 2013 से लागू है और इस अधिनियम के तहत महिलाओं को कार्य स्थल पर संरक्षण प्रदान किया गया है प्रशिक्षण में बाल संरक्षण अधिकारी अजय सक्सेना द्वारा प्रेजेंटेशन के माध्यम से अधिनियम को विस्तार से अवगत कराया गया बताया गया कि यह अधिनियम न केवल शासकीय कार्यालय ऑफिस समाज शास्त्र की ओर शासकीय संस्थाओं कार्यालय पर लागू होता है। ऐसे सभी कार्यालय जिम 10 या 10 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं वहां पर आंतरिक परिवार समिति गठित किया जाने अनिवार्य है और ऐसे समझ कार्यालय जहां पर कोई भी महिला कर्मी कार्यरत नहीं है वहां भी आंतरिक परिवार समिति का गठन किया जाने अनिवार्य है आंतरिक परिवार समिति में कार्यालय अथवा संस्था की सबसे वरिष्ठ महिला अधिकारी और एक आशा की सदस्य जो संगठन जो बाहर का होगा जिसका कार्यालय से संबंध नहीं होगा और कार्यालय के अधिकारी कर्मचारी होंगे।
इसी प्रकार स्थानीय परिवार समिति का गठन जिला स्तर पर किया गया है जिसमें एक पीटासिन अधिकारी महिला होगी और जिला कार्यक्रम अधिकारी उसके सदस्य सचिव होंगेऔर दो व्यक्ति अन्य होंगे जिन्हें महिला के संबंध में अधिकारों के संबंध में कानून के संबंध में जागरूकता की जानकारी है समस्त कार्यालय प्रमुखों का यह दायित्व है कि अपने कार्यालय में आंतरिक परिवार समिति का गठित करें उक्त अधिनियम के तहत मुख्य कार्यपालिका अधिकारी जिला पंचायत को नोडल बनाया गया है और अधिनियम की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं की है।
ऐसे कार्यालय प्रमुख जो अपने कार्यालय में आंतरिक परिवार समिति गठन करने में विफल रहते हैं अथवा समिति का कार्यकाल जो 3 वर्ष निर्धारित है पूर्ण होने के पश्चात पुनर्गठन करने में विफल रहते हैं उन पर 50000 तक का जुर्माना अधुरूपित किया जा सकता है प्रस्तुतीकरण में आगे बताया गया की कार्य स्थल की परिभाषा अब केवल ऑफिस के अथवा कार्यालय इन घंटे पर निर्भर नहीं है अभी तो कार्य स्थल बदलते परिवेश में टेक्निकल और डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुका है ऐसे में वीडियो कॉल वॉइस कॉल मोबाइल पर किसी भी प्रकार का मैसेज संदेश जिस किसी महिला को आशाए महसूस होता है वह भी इस दायरे की श्रेणी में आते हैं इस अधिनियम के तहत गठित आंतरिक परिवार समिति राजस्थानी परिवार समिति को सिविल न्यायालय की शक्तियां हैं वह परबादी के ऊपर नोटिस जारी करके उनसे साक्ष्य मांग सकते हैं और समिति के समक्ष उपस्थित होने हेतु निर्देशित किया जा सकता है मुख्य कार्यपालिका अधिकारी मनोज सरियाम द्वारा सभी कार्यालय प्रमुखों से अपेक्षा की गई कि उनके कार्यालय में पूर्व से ऐसी समिति का गठित हैं और जहां समिति घटित नहीं है वह तत्काल उनके पुनर्गठन की कार्यवाही कर जिला कार्यक्रम अधिकारी को आदेश की एक प्रति उपलब्ध कराएं
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