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उत्तर प्रदेश लखनऊ। सहारा इंडिया में नौकरियों से निकाला जा रहा है और उसके बाद जो भी देय होती है वेतन बकाया एवं अन्य देय नहीं भुगतान करते हैं तथा ना ही कर्मचारियों को नोड्यूल्स मिल पाता है, बहुत बुरी स्थिति है सहारा इंडिया की सरकार को ध्यान देने की जरूरत है सरकार से गुजारिश करता हूं सहारा इंडिया की तरफ नजर रखें और देखें कितना अन्याय हो रहा है,और हुआ है कौन लोग डायरेक्टर हैं कौन लोग वड़े अधिकारी हैं सभी विभागों की जांच कराए तो उनकी आय से अधिक मामला सामने आएगा अगर सरकार जांच कर दे, जिस तरह से सहारा इंडिया कर्मचारियों को निकाले जा रहे है, ……..हमें भी उसी कड़ी से निकला गया था,……अगर बुलाकर कह देते प्रबंध तंत्र कि हम अब आपकी सेवाएं नहीं ले सकते कंपनी को दिक्कत है, आप अपना रास्ता ले ले ले तो मुझे लगता है, हर व्यक्ति अपना रास्ता ले ले ऐसी स्थित मेंऔर आपका सम्मान भी बड़ जाता आप का आपने सही बोला, लेकिन जिस तरह निकाला जाता है,यह तरीका सही नहीं है । क्योंकि ऑफिस अधिकतर बंद है उनका ट्रांसफर दूर-दूर कर दिया जाता है। सैकड़ो सैकड़ो किलोमीटर दूर और वेतन लोगों को मिल नहीं रहा है, आर्थिक रूप से वैसे ही परेशान है सहारा इंडिया धोखे से कर्मचारियों को इधर-उधर स्थानांतरण कर रही है , लोगों को मजबूर कर देती है रिजाइन के लिए मेरा ख्याल है अगर सहारा इंडिया के प्रबंध तंत्र एक मीटिंग करके सभी से कह दें अभी तक हमने आपको खूब अच्छा वेतन दिया खूब अच्छी तरीके से आपको सुविधा पूर्वक रखा आज हम आप लोगों की सेवाएं नहीं ले सकते हैं वेतन नहीं दे सकते इस लिए हमारे पास आप लोगों की सेवाएं लेना मुश्किल हो रहा है, वेतन देना आप लोग को नहीं दे पा रहे है,अपना रास्ता ले ले मुझे लगता है ऐसी स्थिति में कोई भी नहीं रुकेगा आपका सम्मान करते हुए नौकरी छोड़कर चले जाएंगे लेकिन धोखा देकर परेशान करके निकालने की प्रक्रिया जो चल रही है वास्तव में बहुत ही अमानवीय व्यवहार है, सिर्फ सहारा इंडिया परिवार के नाम से अभी तक आप छलावा करते आए हैं, जबकि सहारा परिवार दूर-दूर से नहीं है जो ईश्वर देख रहा है क्योंकि ईश्वर की लाठी में बड़ी दम होती है, वह आप देख चुके हैं 10 एवं 12 साल से वह दम ईश्वर ने दिखाई सहारा इंडिया में कर्मचारी जितने अच्छे-अच्छे पदों पर रहे हैं भ्रष्टाचारी अच्छे-अच्छे पदों पर बैठे हुए थे उनकी क्या संपत्तियां हैं उन्होंने क्या-क्या घोटाले किए है ,सहारा इंडिया में रहकर ,वह सब सामने आ रहा है देख रहे हैं कितनी डायरेक्टर बर्खास्त कर निकाल दिए गए हैं, जो इस समय जिस समस्या से सहारा इंडिया गुजर रही है, तब यह घोटाला कर रहे हैं भ्रष्टाचारी कर रहे हैं ,जब सहारा इंडिया चरम पर थी तो उन्होंने कितना लूटा होगा किस तरह लूटा होगा इसका स्मरण करिए , जो लोग बर्खास्त किए गए जिन लोगों ने डायरेक्टर पद छोड़ दिया है अधिकारी पद छोड़ दिया है उन्होंने इतना कमा लिया है पैसा कई पीढ़ी बैठकर खा सकती है , उनको अब सहारा इंडिया की जरूरत नहीं है,बर्खास्त कर दिए गए और भी बहुत से डायरेक्ट हैं, डायरेक्टर से नीचे की पोस्ट के हैं बहुत से अधिकारी हैं जिनके पास आए से अधिक मामला सामने आएगा अगर जांच सरकार कर ले मैं सरकार उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग करूंगा कि एक बार सहारा इंडिया के वरिष्ठ डायरेक्टरो की अधिकारियों की आए क्या थी नौकरी शुरुआत करते समय, आज क्या है इसको समझ कर देख कर जांच कर ले दूध का दूध पानी का पानी सब नजर आ जाएगा, आज उनकी हैसियत कितनी है , बड़े-बड़े फार्म हाउस हैं,देश के कई राज्यों में उनके मकान है और उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, तथा हिंदुस्तान के अच्छे-अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं सहारा इंडिया का गेस्ट हाउस है वहां
में जबकि वह इतना अच्छा-अच्छा वेतन पाते हैं किराए पर मकान लेकर रह सकते हैं, वहीं पर छोटा सा कर्मचारी उन गेस्ट हाउस में अपने बच्चों को नहीं रुकवा सकता नहीं सोच सकता है, सोच लिया तो समझो बहुत बड़ा गुनाह कर दिया बेइज्जती कर दी जाएगी और इस तरह का व्यवहार किया जाएगा जैसे अंग्रेज लोग गुलामी के समय भारतीयों पर करते थे जैसा मैंने बुजुर्गों से सुना है ,यह सहारा इंडिया परिवार है मित्रो,जिस कारण आज बर्बाद हो गया है, मैं फिर कह रहा हूं ईश्वर की मार बहुत बुरी होती है , क्योंकि मैं ईश्वर को बहुत मानता हूं, उनके द्वारा मुझे सत्य लिखने की हिम्मत प्रदान होती है, ईश्वर की लाठी मे आवाज नहीं होती है। सहारा इंडिया खुद नहीं चाहती है कोर्ट से कोई डिसीजन कर्मचारी या सहारा इंडिया के पक्ष या विपक्ष में हो नहीं 12 साल हो गए हैं अभी तक चाहते तो कुछ ना कुछ पॉजिटिव या निगेटिव रिजल्ट आ जाता लेकिन वह तारीख पर तारीख लेकर समय काट रहे हैं। सहारा इंडिया परिवार में ईमानदार व्यक्ति कार्य नहीं कर सकता क्योंकि उसे बहुत परेशान किया जाता है, अगर वह सत्य के पद पर चले तो उसे परेशानी झेलनी पड़ेगी जबकि वहां का सौगंन है, सत्य परेशान होता है पराजित नहीं सिर्फ एक दिखावा है, सहारा इंडिया करती है जबकि इसका पालन दूर-दूर तक नहीं है। और एक बहुत बड़ी विशेष चीज है आप को बताना चाहते है जिसकी आप सहारा इंडिया में किसी अधिकारी की शिकायत करेंगे वही जिसकी आप शिकायत कर रहे हैं वही आपका जांच अधिकारी बनेगा भाई है अचंभा। एक और खास बात है सहारा इंडिया में बहुत से डायरेक्ट बहुत से बड़े-बड़े अधिकारी है ऐसे हैं जिन्होंने सहारा इंडिया से काम कर बहुत सारे व्यापार और बिजनेस कर रहे हैं, अगर मुझे सरकार नाम पूछे तो मैं सरकार को कई नाम बता सकता हूं, जिनकी जांच करवा ली जाए सभा हकीकत सामने आ जाएगी क्योंकि यह कहावत कही गई है चोर चोर मौसेरा भाई सभी इस धारणा के हैं तो कौन किसकी कहे इसलिए अभी तक चलता रहा उनको भी मालूम है कितना डायरेक्टर ने और बड़े-बड़े अधिकारियों ने लूटा है, और एक खास बात है सारा इंडिया ने बहुत सारी जमीन ले रखी थी जो छोटे कर्मचारी हैं जो पिछड़ी जात के हैं उनके नाम सहारा इंडिया के मलिकान ने संपत्ति ले रखी है, सरकार से बचने के लिए, सहारा इंडिया लोगों को मूर्ख बनाकर पैसा अतः कमाए परंतु मेहनत की कमाई होती तो दर्द होता जनता को लूटा है ईन्होंने,इनको लूटा है उन्होंने वस फर्क ईतना है। और एक खास बात आपको बताना चाहता हूं जो लोग रिजाइन दे देते हैं जो लोग नौकरी छोड़ देते हैं उनको नोड्यूज नहीं मिल रहा है, बड़ी विचित्र स्थिति है। मैंने सहारा इंडिया के डायरेक्टर और बड़े-बड़े अधिकारियों के संबंध में कार्यरत समय में मैं बहुत कुछ लिखा जो मेरी पर्सनल फाइल सहारा इंडिया के पास है उसमें पत्र अवश्य रखे होंगे परंतु उन पर कार्रवाई न होकर उल्टी मेरे ऊपर कार्रवाई होती थी, और मुझे आर्थिक, मानसिक, रूप से उत्पीड़न किया जाता था, यह सहारा इंडिया परिवार है यह परिवार के नाम से मूर्ख बनाते रहे हैं, कर्मचारियों को मैं आपको बताना चाहता हूं सहारा इंडिया परिवार कहां तक सीमित है,सिर्फ डायरेक्टर, जनरल मैनेजर ,रीजनल मैनेजर,जोनल चीफ जनरल मैनेजर, और अपने-अपने विभागों के विभागअध्यक्ष तक सहारा इंडिया परिवार है, उसके बाद उसके नीचे सब गुलाम है क्योंकि यहां पर कोई यूनियन नहीं बनने दी गई एक व्यक्ति ने यूनियन बनाई थी सहारा इंडिया के अन्यायों के प्रति सहारा इंडिया के साथ मीडिया के लोग हैं, इसके साथ बाहुबली है, इसके साथ बड़े-बड़े नेता हैं, इसके साथ बड़े-बड़े उद्योगपति हैं जिस कारण यह अपनी मनमानी तानाशाही करते आए हैं ,राजनीतिक लाभ लेते रहे हैं और आपको बताना चाहता हूं मैं सोचता हूं कभी-कभी यह सहारा इंडिया परिवार कैसा परिवार है सरकार को भी नहीं दिखाई दे रहा है कर्मचारियों को कितना शोषण होता है, बड़ी-बड़ी कंपनियों में देखो जाकर अंबानी से लेकर अदानी तक डालमिया से लेकर टाटा तक कितनी कर्मचारियों की इज्जत होती है कितना अच्छा वेतन देते हैं कितनी सुविधाएं देते हैं आप उनकी बराबरी तो करना चाहते हैं लेकिन दूसरे का पैसा लेकर हड़पकर उनकी बराबरी कर रहे हैं कभी नहीं कर सकते बराबरी क्योंकि उनको जो भी है जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है, आपका जमीनी स्तर पर सिर्फ लोगों को मूर्ख बनाकर धनउगाही का काम कर रहे थे। अब तो यह सिस्टम चला है सहारा इंडिया में कर्मचारियों को बैठ।ल देते हैं और कह देते हैं साइन नहीं करना है बताइए इसका क्या मतलब जब वह 10-15या 20 दिन साइन नहीं करेगा कर्मचारी उसे अनादिकृत रूप से अनुपस्थित दिखाकर उसकी सेवा समाप्त कर देंगे लेटर पकड़ा देंगे है यह घिनौना काम पीठ पर छुरा मारने का काम कर रहे हैं। लिखने को बहुत कुछ है लिखना चाहूं तो लिखता ही रहूंगा इतने इनके अत्याचारो की लिस्ट है। एक बात और है यहां का कर्मचारी भी बहुत ही गद्दार है अगर मर रहे हो तो कोई किसी का साथ नहीं देगा, क्योंकि हर कर्मचारी किसी न किसी के माध्यम से जुड़ा हुआ है। जिसका फायदा मैनेजमेंट उठना है। जिन लोगों ने यूनियन बनाई थी सहारा इंडिया बाहुबली कंपनी थी, उन्होंने सबको जेल भिजवा दिया और उनका किसी भी कर्मचारी अधिकारी ने साथ नहीं दिया एक-एक साल जेल में रहकर वह लोग बाहर आए मैंने कई बार मना किया था सहारा इंडिया के कर्मचारियों के भरोसे अगर यूनियन बनाओगे तो जेल निश्चित जाओगे क्योंकि वहां का कर्मचारी भी आपका साथ नहीं देगा लेकिन नहीं माने यूनियन वनाई और क्या हश्र हुआ वह सभी ने देखा। मित्रों और साथियों अब लिखने का कोई मुझे फायदा नहीं है क्योंकि मैं बहुत लिखा समझने का प्रयास किया तो मुझे व्यंग्यात्मक शैली से पर किया जाता रहा और लिखित चेतावनी पत्र मिलते थे, अब सहारा का भी समय सहारा जैसा नहीं रहा, मेरा भी समय अब वह समय नहीं रहा इसीलिए लिखने को तो बहुत है पर लिखने का कोई फायदा नहीं कहावत कही गई है जैसी करनी वैसी भरनी।
देवेश प्रताप सिंह राठौर,ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




